अष्टकूट · 6 गुण
गण
स्वभावाचा मेळ
नक्षत्रे तीन गणांत विभागली आहेत — देव, मनुष्य, राक्षस. एकच गण असेल तर सहाही गुण; देव वर व मनुष्य वधूत सहा, मनुष्य वर व देव वधूत पाच; देव-राक्षसात एक; मनुष्य-राक्षसात शून्य. शून्य आले तरी निवारणाचे शास्त्रीय नियम आहेत.
शून्य आल्यास काय
गणातील शून्य मनुष्य-राक्षसाच्या मेळातून येते आणि गंभीर मानले जाते. पण तीन शास्त्रीय अपवाद आहेत — एकच चंद्रराशी, एक नक्षत्र-स्वामी, किंवा मित्र राशी-स्वामी — यांपैकी एक लागू झाला तरी दोष निरस्त होतो.
गणना कशी होते
- दोघांच्या नक्षत्रावरून गण काढा — देव, मनुष्य किंवा राक्षस.
- एकच गण असेल तर 6; देव वर व मनुष्य वधू 6, मनुष्य वर व देव वधू 5; देव आणि राक्षस 1; मनुष्य आणि राक्षस 0.
- शून्य आल्यास तीन अपवाद पाहिले जातात — दोघांची चंद्र-राशी एक असणे, नक्षत्र-स्वामी एक असणे, किंवा राशी-स्वामी परस्पर मित्र असणे. यांपैकी एकही लागू झाला तर गण दोष निरस्त.
इथे आम्ही रूढ प्रचलनापेक्षा वेगळे चालतो
1 आणि 5 — दोन्ही “पूर्ण नाहीत”, पण दोन्ही खूप वेगळे आहेत. देव आणि राक्षसाचा 1 हा सर्वात तीव्र भेद; देव आणि मनुष्याचा मेळ जवळजवळ पूर्ण — आणि तिथे क्रम महत्त्वाचा: देव वर व मनुष्य वधू 6, उलटे 5. आमचा अहवाल दोघांना सारखं वाचत नाही, आणि “6 मिळाले नाहीत” म्हणून सोडूनही देत नाही.
निर्णयात याचे वजन
छत्तीस गुणांशिवाय या कूटाचे स्वतःचे एक वेगळे मतही आहे, वजन 0.9. इथला शून्य गुणांच्या संख्येने झाकला जात नाही — म्हणूनच तो वेगळा तोलला जातो.
| मत | वजन |
|---|---|
| छत्तीस गुण — सर्व मिळून | 1.0 |
| नाडी — स्वतःचे वेगळे मत | 1.3 |
| भकूट — स्वतःचे वेगळे मत | 1.1 |
| गण — स्वतःचे वेगळे मत | 0.9 |
| दशकूट — रज्जू व वेध | 0.6 |
| विस्तारित कूट | 0.6 |
| उरलेली 33 मते | 24.2 |
| एकूण — 39 | 29.7 |
आमचा निर्णय 39 मते वजनासह तोलून बनतो, ज्यांचे एकूण वजन 29.7 आहे. छत्तीसही गुण मिळून त्यांतले एक मत आहेत — म्हणजे पूर्ण निर्णयाच्या सुमारे 3.4%. बाकीचे सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, विंशोपक, जैमिनी, दशा-काळ आणि मांगलिक अशी मते ठरवतात. म्हणूनच हा अहवाल कमी गुण पाहून विवाहाला कधीही नकार देत नाही.
शास्त्रीय तक्ता
| नक्षत्र | गण | नक्षत्र | गण | नक्षत्र | गण |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. अश्विनी | देव | 2. भरणी | मनुष्य | 3. कृत्तिका | राक्षस |
| 4. रोहिणी | मनुष्य | 5. मृगशिरा | देव | 6. आर्द्रा | मनुष्य |
| 7. पुनर्वसु | देव | 8. पुष्य | देव | 9. आश्लेषा | राक्षस |
| 10. मघा | राक्षस | 11. पूर्वाफाल्गुनी | मनुष्य | 12. उत्तराफाल्गुनी | मनुष्य |
| 13. हस्त | देव | 14. चित्रा | राक्षस | 15. स्वाति | देव |
| 16. विशाखा | राक्षस | 17. अनुराधा | देव | 18. ज्येष्ठा | राक्षस |
| 19. मूल | राक्षस | 20. पूर्वाषाढ़ा | मनुष्य | 21. उत्तराषाढ़ा | मनुष्य |
| 22. श्रवण | देव | 23. धनिष्ठा | राक्षस | 24. शतभिषा | राक्षस |
| 25. पूर्वाभाद्रपद | मनुष्य | 26. उत्तराभाद्रपद | मनुष्य | 27. रेवती | देव |
कोणत्या जोडीला किती गुण:
| वराचा गण | वधूचा गण | गुण |
|---|---|---|
| देव | तोच गण | 6 |
| देव | मनुष्य | 6 |
| मनुष्य | देव | 5 |
| देव | राक्षस | 1 |
| राक्षस | देव | 1 |
| मनुष्य | राक्षस | 0 — गण दोष |
बाकीचे सात कूट
दोघांचा जन्म-तपशील भरा
तारीख, वेळ आणि ठिकाण — तिन्ही जितकी अचूक, मिलनही तितकेच अचूक. वेळ आठवत नसेल तरी चालेल.