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आज का चौघड़िया — दिन और रात का चौघड़िया

अपना शहर चुनिए — दिन और रात के सोलह चौघड़िया उनके सही समय के साथ, और जो चौघड़िया अभी चल रहा है, वह सबसे ऊपर अलग से।

आज का चौघड़िया दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ बराबर भागों में, और रात को सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक आठ भागों में बाँटकर बनता है। हर भाग का एक स्वामी ग्रह है, और उसी से वह शुभ, सामान्य या टालने लायक माना जाता है। नीचे की सारणी आपके चुने शहर के आज के सूर्योदय और सूर्यास्त से गिनी गई है, और जो चौघड़िया अभी चल रहा है, वह सबसे ऊपर अलग डिब्बे में और सारणी में उभरा हुआ दिखता है।

चौघड़िया — 6 नवंबर 2026

शुक्रवार · शहर: दिल्ली · सूर्योदय 06:37 · सूर्यास्त 17:33 · अगला सूर्योदय 06:37 (अगले दिन)

दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त)

चौघड़ियासमयफल
चर शुक्र06:37 – 07:59सामान्य (यात्रा के लिए ठीक)
लाभ बुध07:59 – 09:20शुभ
अमृत चंद्र09:20 – 10:43शुभवार वेला
काल शनि10:43 – 12:05टालेंकाल वेला
शुभ गुरु12:05 – 13:26शुभ
रोग मंगल13:26 – 14:49टालें
उद्वेग सूर्य14:49 – 16:11टालें
चर शुक्र16:11 – 17:32सामान्य (यात्रा के लिए ठीक)

रात का चौघड़िया (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)

चौघड़ियासमयफल
रोग मंगल17:32 – 19:11टालें
काल शनि19:11 – 20:49टालें
लाभ बुध20:49 – 22:27शुभकाल रात्रि
उद्वेग सूर्य22:27 – 00:05टालें
आधी रात के बाद · 7 नवंबर 2026
शुभ गुरु00:05 – 01:43शुभ
अमृत चंद्र01:43 – 03:21शुभ
चर शुक्र03:21 – 04:59सामान्य (यात्रा के लिए ठीक)
रोग मंगल04:59 – 06:37टालें

गणना: इस शहर का सूर्योदय-सूर्यास्त (स्विस एफ़िमेरिस; सूरज का ऊपरी किनारा क्षितिज पर, मानक अपवर्तन सहित), दिन और रात आठ-आठ बराबर भागों में। वार सूर्योदय से बदलता है, इसलिए आधी रात के बाद, सूर्योदय तक, पिछले वार का रात्रि-चौघड़िया चलता है। समय शहर के स्थानीय समय में, 24 घंटे की घड़ी से। जहाँ शुभ या चर चौघड़िया अशुभ से मिलता है, वहाँ सीमा अशुभ की ओर पूरे मिनट तक रखी है, ताकि शुभ का दिखाया समय अशुभ का एक भी क्षण न छुए — इसलिए कभी सूर्यास्त वाली सीमा ऊपर लिखे सूर्यास्त से एक मिनट अलग दिखती है। वार वेला, काल वेला और काल रात्रि परंपरा के निशान हैं, और इन्हें भी टालने वाले समय में गिना है।

सारणी के ऊपर शहर का नाम लिखिए — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, अहमदाबाद, सूरत, मुंबई, दिल्ली या कोई और — और "देखें" दबाइए। फ़ोन पर "मेरे पास का शहर" बटन से सबसे नज़दीकी शहर अपने-आप चुना जाता है; आपकी जगह फ़ोन में ही रहती है, हमारे पास सिर्फ़ शहर का नाम आता है, ठीक वैसे ही जैसे आप ख़ुद लिखते। "अगला दिन" दबाएँ तो कल का चौघड़िया खुलता है, और "पिछला दिन" से बीता हुआ। कोई "आज का चौघड़िया दिन का" ढूँढ़ता है, कोई "आज का चौघड़िया रात का" — दोनों इसी सारणी में हैं। गूगल पर 'aaj ka choghadiya' या 'choghadiya today' लिखकर जो खोजते हैं, उनके लिए यही पन्ना हर दिन अपने-आप नया बनता है।

चौघड़िया क्या है — नाम का अर्थ

"चौघड़िया" दो शब्दों से बना है — चौ यानी चार, और घड़ी यानी घटी। पुराने समय-माप में एक घटी 24 मिनट की होती है, इसलिए चार घड़ी लगभग 96 मिनट हुईं। यही चौघड़िया का मोटा माप है। पर यह सिर्फ़ औसत है। असल में दिन का हर चौघड़िया दिन की लंबाई का आठवाँ हिस्सा होता है, और रात का हर चौघड़िया रात की लंबाई का। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, इसलिए दिन के चौघड़िया छोटे और रात के लंबे हो जाते हैं; गर्मियों में उलटा।

हमारी गणना से एक उदाहरण। दिल्ली में दिसंबर के सबसे छोटे दिन के आसपास दिन का एक चौघड़िया लगभग 77 मिनट का होता है और रात का लगभग 103 मिनट का। जून के सबसे लंबे दिन के आसपास दिन का चौघड़िया लगभग 104 मिनट का हो जाता है और रात का लगभग 76 मिनट का। चेन्नई जैसे दक्षिण के शहरों में यह अंतर कम है, क्योंकि वहाँ दिन-रात की लंबाई साल भर कम बदलती है।

चौघड़िया की पद्धति मुख्य रूप से लोक-परंपरा और पंचांगों से आई है। गुजरात, राजस्थान, मारवाड़ और मालवा के व्यापारी परिवारों में इसका चलन सबसे गहरा है — दुकान खोलना, बही-खाता शुरू करना, सौदा करना, यात्रा पर निकलना — ऐसे रोज़ के कामों के लिए लोग चौघड़िया देखते हैं। विवाह जैसे बड़े संस्कारों का मुहूर्त अलग नियमों से निकलता है (तिथि, नक्षत्र, लग्न और दोनों की कुंडली), उसकी बात आगे है।

सात चौघड़िया और उनके स्वामी ग्रह

चौघड़िया सात हैं, और हर एक का एक स्वामी ग्रह है। ग्रह के स्वभाव से ही चौघड़िया का स्वभाव माना गया है — शुभ ग्रहों (चंद्र, गुरु, बुध) के चौघड़िया शुभ, शुक्र का सामान्य, और सूर्य, मंगल, शनि के चौघड़िया नए शुभ काम के लिए टालने लायक।

चौघड़ियास्वामी ग्रहस्वभावपरंपरा में किस काम से जोड़ा जाता है
अमृतचंद्रशुभलगभग हर शुभ काम — पूजा, नया काम, भोजन-प्रसाद, घर से जुड़ी शुरुआत
शुभगुरुशुभपढ़ाई की शुरुआत, धार्मिक काम, बड़ों से मिलना, रिश्ते की बातचीत
लाभबुधशुभव्यापार, ख़रीदारी, लेन-देन, हिसाब-किताब, नई सीख
चरशुक्रसामान्ययात्रा, घूमना-फिरना, वाहन से जुड़े काम
उद्वेगसूर्यटालेंनई शुभ शुरुआत टालें; कुछ परंपराएँ सरकारी काम के लिए ठीक मानती हैं
रोगमंगलटालेंनई शुरुआत टालें; परंपरा इसे विवाद और भागदौड़ से जोड़ती है
कालशनिटालेंनई शुरुआत टालें; परंपरा इसे पुराने अटके काम निपटाने से जोड़ती है

शुभ चौघड़िया कहने पर ज़्यादातर लोग अमृत, शुभ और लाभ — इन तीन को गिनते हैं। 'shubh choghadiya' खोजने वाले यही जानना चाहते हैं कि इन तीन में से आज कौन-सा कब है; ऊपर की सारणी में ये हरे किनारे से दिखते हैं। चर को "सामान्य" कहा जाता है — यात्रा के लिए इसे अच्छा माना गया है, क्योंकि "चर" का अर्थ ही है चलने वाला।

एक बात साफ़ रहे — "टालें" का अर्थ डर नहीं है। उद्वेग, रोग या काल में कोई अनहोनी नहीं होती। परंपरा बस इतना कहती है कि जिस काम को आप अपनी सुविधा से आगे-पीछे कर सकते हैं, उसकी शुरुआत शुभ चौघड़िया में कर लें। दवा लेना, किसी की मदद करना, नौकरी पर समय से पहुँचना — ज़रूरी काम चौघड़िया देखकर रोके नहीं जाते।

दिन का चौघड़िया कैसे बनता है

दिन का चौघड़िया तीन क़दमों में बनता है।

  1. शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त निकालिए। यह हर शहर और हर दिन अलग है — घड़ी के 6 बजे से नहीं गिनते।
  2. दिन की लंबाई को आठ से बाँटिए। जैसे किसी दिन जयपुर में सूर्योदय 06:24 और सूर्यास्त 18:04 है, तो दिन 11 घंटे 40 मिनट, यानी 700 मिनट का है। 700 को 8 से बाँटें तो एक चौघड़िया 87½ मिनट का हुआ।
  3. वार के हिसाब से पहला चौघड़िया रखिए, फिर तय क्रम में आगे बढ़िए।

दिन का पहला चौघड़िया उस वार के स्वामी ग्रह का होता है — रविवार को सूर्य का उद्वेग, सोमवार को चंद्र का अमृत, मंगलवार को मंगल का रोग, बुधवार को बुध का लाभ, गुरुवार को गुरु का शुभ, शुक्रवार को शुक्र का चर और शनिवार को शनि का काल। इसके बाद क्रम हमेशा यही चलता है:

उद्वेग → चर → लाभ → अमृत → काल → शुभ → रोग → फिर उद्वेग

आठवाँ चौघड़िया फिर से पहले वाला ही होता है, क्योंकि सात के बाद क्रम लौट आता है। इस तरह सातों वारों के दिन के चौघड़िया ये बनते हैं:

वारदिन के आठ चौघड़िया (सूर्योदय से)
रविवारउद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग
सोमवारअमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ, अमृत
मंगलवाररोग, उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग
बुधवारलाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ
गुरुवारशुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ
शुक्रवारचर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर
शनिवारकाल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल

रात का चौघड़िया कैसे बनता है

रात का चौघड़िया सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक की अवधि को आठ बराबर भागों में बाँटकर बनता है। यहाँ एक बारीकी है — रात की लंबाई निकालने के लिए अगले दिन का सूर्योदय चाहिए, उसी शहर का। हमारी सारणी यही करती है, इसलिए रात का आख़िरी चौघड़िया ठीक अगले सूर्योदय पर ख़त्म होता है।

रात का क्रम दिन से अलग है:

शुभ → अमृत → चर → रोग → काल → लाभ → उद्वेग → फिर शुभ

और रात का पहला चौघड़िया वार के हिसाब से यह होता है:

वार की रातरात के आठ चौघड़िया (सूर्यास्त से)
रविवारशुभ, अमृत, चर, रोग, काल, लाभ, उद्वेग, शुभ
सोमवारचर, रोग, काल, लाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत, चर
मंगलवारकाल, लाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत, चर, रोग, काल
बुधवारउद्वेग, शुभ, अमृत, चर, रोग, काल, लाभ, उद्वेग
गुरुवारअमृत, चर, रोग, काल, लाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत
शुक्रवाररोग, काल, लाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत, चर, रोग
शनिवारलाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत, चर, रोग, काल, लाभ

जो लोग 'rat ka choghadiya' खोजते हैं, वे अक्सर देर रात की यात्रा, रात में निकलने वाली बारात या किसी ज़रूरी पूजा का समय देखना चाहते हैं। ऊपर की सारणी का दूसरा भाग यही है।

वार वेला, काल वेला और काल रात्रि

कई पंचांग — ख़ासकर गुजराती पंचांग — चौघड़िया के साथ तीन और निशान लगाते हैं। हमारी सारणी भी इन्हें छोटे निशान के रूप में दिखाती है:

  • काल वेला — दिन का हर "काल" चौघड़िया। शनिवार को यह दिन का पहला और आठवाँ, दोनों होता है।
  • काल रात्रि — रात का हर "लाभ" चौघड़िया। रात में लाभ नाम से शुभ लगता है, पर परंपरा इस भाग को काल रात्रि मानकर नई शुभ शुरुआत से बचती है।
  • वार वेला — दिन का एक तय भाग: रविवार को चौथा, सोमवार को सातवाँ, मंगलवार को दूसरा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को आठवाँ, शुक्रवार को तीसरा और शनिवार को छठा।

इसका एक असर ध्यान देने लायक है। शुक्रवार को दिन का तीसरा चौघड़िया अमृत है, पर वही वार वेला भी है; रविवार को चौथा अमृत भी वार वेला में पड़ता है। ऐसे में बहुत से परिवार उस अमृत को छोड़कर अगला शुभ चौघड़िया चुनते हैं। यह परंपरा की बात है — कोई ज़रूरी काम इस वजह से रोकने की ज़रूरत नहीं।

अभी कौन-सा चौघड़िया चल रहा है — और सूर्योदय से पहले का नियम

ज्योतिष में वार आधी रात से नहीं, सूर्योदय से बदलता है। इसलिए रात बारह बजे के बाद, सुबह सूर्योदय तक, पिछले वार की रात का चौघड़िया ही चलता रहता है। उदाहरण के लिए, शनिवार की सुबह 4 बजे जो चौघड़िया चल रहा है, वह शुक्रवार की रात का है — शनिवार का नहीं।

बहुत-सी जगह यही भूल होती है — घड़ी में तारीख़ बदलते ही अगले दिन का चौघड़िया पढ़ लिया जाता है। हमारी सारणी यह ध्यान रखती है। सूर्योदय से पहले खोलें, तो वह पिछले दिन का पूरा चौघड़िया दिखाती है और चलती रात का भाग उभार देती है। सूर्योदय होते ही "अभी चल रहा है" वाला डिब्बा नए दिन पर आ जाता है; पन्ना खुला रह गया हो, तो वह अपने-आप एक बार ताज़ा हो जाता है।

"अभी चल रहा है" का डिब्बा आपके फ़ोन या कंप्यूटर की घड़ी से नहीं, असली समय-क्षण से मिलाया जाता है। इसलिए विदेश में बैठकर भारत के किसी शहर का चौघड़िया देखें, तब भी वह सही भाग ही उभारेगा — बशर्ते आपके फ़ोन की घड़ी सही चल रही हो।

अपने शहर का चौघड़िया ही क्यों

पूरे भारत की घड़ी एक है (भारतीय मानक समय), पर सूरज हर शहर में अलग समय उगता है। अक्टूबर के बीच के एक दिन की हमारी गणना देखिए:

शहरसूर्योदयसूर्यास्तदिन का एक चौघड़िया
गुवाहाटी05:2316:55लगभग 86½ मिनट
कोलकाता05:3417:11लगभग 87 मिनट
चेन्नई06:0017:49लगभग 88½ मिनट
दिल्ली06:2317:51लगभग 86 मिनट
जयपुर06:2717:58लगभग 86 मिनट
मुंबई06:3418:15लगभग 87½ मिनट
अहमदाबाद06:3718:13लगभग 87 मिनट
जोधपुर06:3818:09लगभग 86½ मिनट

गुवाहाटी और जोधपुर के सूर्योदय में पूरे सवा घंटे का अंतर है। अगर जोधपुर में बैठकर कोलकाता का चौघड़िया पढ़ लें, तो सुबह का पहला ही चौघड़िया एक घंटा आगे-पीछे हो जाएगा। इसलिए 'today choghadiya' देखते समय शहर हमेशा अपना चुनिए। गाँव या क़स्बे में हों, तो सबसे नज़दीकी शहर चुनिए — 20-30 किलोमीटर के अंतर से सूर्योदय आम तौर पर एक-दो मिनट ही बदलता है।

पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर क्यों दिखता है

अगर आप दो पंचांगों का चौघड़िया मिलाएँ, तो कभी-कभी सीमा पर एक-दो मिनट का अंतर दिखेगा। इसका सबसे बड़ा कारण सूर्योदय की परिभाषा है। हमारी गणना सूर्योदय उस क्षण को मानती है जब सूरज का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखे, और हवा में रोशनी के मुड़ने (अपवर्तन) का मानक हिसाब जोड़ती है — खगोल-वेधशालाएँ भी यही परिभाषा मानती हैं, क्योंकि आँख को सूरज इसी क्षण दिखता है। कुछ पंचांग सूरज के बीच के हिस्से को लेते हैं; सूरज का आधा व्यास पार होने में लगभग एक मिनट लगता है, इसलिए उनसे इतना अंतर रहता है। पुरानी सिद्धांत-रीति अपवर्तन के बिना बीच का हिस्सा लेती है, जिससे लगभग चार मिनट का अंतर आता है। सूर्योदय का यह अंतर हर चौघड़िया की सीमा तक पहुँचता है। दूसरा छोटा कारण है कि शहर का कौन-सा बिंदु लिया गया। एक अंतर हमारी अपनी सावधानी से भी आता है: जहाँ शुभ या चर भाग अशुभ से मिलता है, वहाँ हम सीमा को अशुभ की ओर पूरे मिनट तक रखते हैं, ताकि शुभ का दिखाया समय अशुभ का एक भी क्षण न छुए। इसलिए कुछ सीमाएँ दूसरे पंचांगों से एक मिनट अलग दिखती हैं — और वह अंतर हमेशा सावधानी की ओर होता है।

इसका सीधा व्यावहारिक नियम है — किसी चौघड़िया की शुरुआत या अंत के ठीक एक-दो मिनट पर काम मत रखिए। बीच का समय चुनिए। चौघड़िया डेढ़ घंटे के आसपास का होता है, इसलिए यह मुश्किल नहीं है।

चौघड़िया, राहुकाल और मुहूर्त — किसका क्या काम

ये तीनों अलग चीज़ें हैं, और अक्सर आपस में मिला दी जाती हैं।

  • चौघड़िया रोज़ के छोटे कामों के लिए है — दुकान खोलना, सौदा करना, यात्रा पर निकलना, कोई सामान ख़रीदना। यह सिर्फ़ सूर्योदय-सूर्यास्त और वार से बनता है।
  • राहुकाल दिन का एक अलग भाग है, जिसकी परंपरा दक्षिण भारत में ज़्यादा मज़बूत है। कई बार राहुकाल किसी शुभ चौघड़िया के भीतर पड़ जाता है। ऐसे में बहुत से परिवार उतना समय भी छोड़ देते हैं। हमारे पंचांग पन्ने पर आज का राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल दिए हैं।
  • मुहूर्त बड़े संस्कारों के लिए है। कई लोग चौघड़िया को ही "चौघड़िया मुहूर्त" कह देते हैं, पर पूरा मुहूर्त अलग चीज़ है — विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण। इसमें तिथि, नक्षत्र, योग, लग्न और जिसका काम है उसकी कुंडली देखी जाती है। सिर्फ़ चौघड़िया देखकर विवाह की तारीख़ तय नहीं होती।

'choghadiya tomorrow' या "कल का चौघड़िया" देखकर अगर आप किसी यात्रा या ख़रीदारी का समय तय कर रहे हैं, तो यह बिल्कुल ठीक तरीक़ा है। पर विवाह या गृह प्रवेश के लिए पूरा मुहूर्त निकलवाइए।

चौघड़िया देखने में होने वाली आम भूलें

  1. दूसरे शहर का चौघड़िया पढ़ना। ऊपर की तालिका ने दिखाया कि शहरों में एक घंटे से ज़्यादा तक का अंतर हो सकता है।
  2. घड़ी के 6 बजे से डेढ़-डेढ़ घंटा गिनना। सूर्योदय कभी 6 बजे नहीं होता, और चौघड़िया की लंबाई भी हर दिन बदलती है।
  3. आधी रात के बाद नए दिन का चौघड़िया पढ़ना। सूर्योदय तक पिछले वार की रात चलती है।
  4. हर छोटे काम को रोक देना। चौघड़िया सुविधा है, बंधन नहीं। जो काम आप आगे-पीछे कर सकते हैं, उसकी शुरुआत शुभ समय में रख लीजिए; बाक़ी काम अपने समय पर कीजिए।
  5. बड़े संस्कार को चौघड़िया से तय करना। विवाह जैसे फ़ैसले दोनों की कुंडली से होते हैं, समय की एक पट्टी से नहीं।

चौघड़िया और विवाह — दोनों की कुंडली क्यों अलग बात है

चौघड़िया बताता है कि आज कौन-सा डेढ़ घंटा किस काम के लिए अच्छा माना गया है। यह सबके लिए एक जैसा है — एक शहर में रहने वाले हर व्यक्ति का आज का चौघड़िया एक ही है। पर विवाह, परिवार में मेल और घर की शांति हर व्यक्ति की अपनी कुंडली से जुड़े विषय हैं। दो लोगों का स्वभाव कितना मिलता है, मांगलिक या नाड़ी दोष है या नहीं, दोनों के जीवन में अभी कौन-सी दशा चल रही है — यह कोई सार्वजनिक सारणी नहीं बता सकती।

इसीलिए कुंडली मिलान ज्योतिष की टीम ने चौघड़िया और पंचांग को रोज़ के कामों के लिए रखा है, और रिश्तों के लिए अलग से कुंडली मिलान बनाए हैं। रिश्ते की बात चल रही हो, तो विवाह कुंडली मिलान दोनों की जन्म-तिथि, समय और जगह से 36 गुण, मांगलिक, नाड़ी-भकूट, उनकी शास्त्रीय छूट, दोनों की पूरी कुंडली और विवाह-काल बताता है। घर में खटपट रहती हो, तो गृह-शांति मिलान घर के किन्हीं दो सदस्यों की कुंडली साथ पढ़कर उपाय बताता है। रिपोर्ट कभी किसी रिश्ते को तोड़ने की सलाह नहीं देती — जहाँ ध्यान चाहिए, वहाँ उपाय बताती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आज का चौघड़िया कैसे देखें?

ऊपर की सारणी में अपना शहर लिखकर "देखें" दबाइए। दिन के आठ चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक और रात के आठ सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक, उनके सही समय के साथ दिखेंगे। हरा किनारा शुभ चौघड़िया का है, सुनहरा चर का, और गुलाबी उन चौघड़िया का जिन्हें नई शुरुआत के लिए टाला जाता है।

अभी कौन-सा चौघड़िया चल रहा है, यह कैसे पता करें?

सारणी के ऊपर "अभी चल रहा है" वाले डिब्बे में चलते चौघड़िया का नाम, उसका फल, और वह कब तक चलेगा — कितने मिनट बाकी हैं — सब लिखा आता है। सारणी में भी वही पंक्ति गहरे किनारे से उभरी दिखती है। यह हर बीस सेकंड में अपने-आप जाँचा जाता है।

रात का चौघड़िया कब से शुरू होता है?

रात का पहला चौघड़िया उस शहर के सूर्यास्त से शुरू होता है, और आठवाँ अगले दिन के सूर्योदय पर ख़त्म होता है। आधी रात से कुछ नहीं बदलता — वार सूर्योदय से बदलता है, इसलिए सुबह सूर्योदय तक पिछली रात का चौघड़िया ही चलता है।

कल का चौघड़िया कैसे देखें?

सारणी के ऊपर "अगला दिन" दबाइए — 'kal ka choghadiya' खोजने वालों के लिए यही सबसे छोटा रास्ता है। कल का पूरा दिन और रात का चौघड़िया उसी शहर के कल के सूर्योदय-सूर्यास्त से खुल जाएगा। इसी तरह "पिछला दिन" से बीता दिन, और "आज" से फिर आज का चौघड़िया देख सकते हैं।

सबसे शुभ चौघड़िया कौन-सा है?

परंपरा में अमृत को सबसे शुभ माना जाता है, फिर शुभ और लाभ। लाभ व्यापार और लेन-देन के लिए, शुभ पढ़ाई और धार्मिक काम के लिए, और अमृत लगभग हर शुभ काम के लिए अच्छा माना गया है। पर वार वेला या राहुकाल साथ पड़ें, तो बहुत से परिवार अगला शुभ भाग चुनते हैं।

क्या चर चौघड़िया शुभ है?

चर को सामान्य माना जाता है — न शुभ, न टालने लायक। इसका स्वामी शुक्र है, और "चर" का अर्थ है चलने वाला, इसलिए यात्रा पर निकलने, वाहन से जुड़े काम या घूमने-फिरने के लिए इसे अच्छा माना गया है। स्थिर काम की शुरुआत के लिए लोग अमृत, शुभ या लाभ को पसंद करते हैं।

अलग-अलग पंचांगों में चौघड़िया का समय एक-दो मिनट अलग क्यों होता है?

ज़्यादातर सूर्योदय की परिभाषा के कारण। हम सूरज के ऊपरी किनारे के क्षितिज पर दिखने को सूर्योदय मानते हैं, अपवर्तन के मानक हिसाब के साथ — यानी वह क्षण जब सूरज आँख को दिखता है। जो पंचांग सूरज का बीच का हिस्सा लेते हैं, उनसे लगभग एक मिनट का, और पुरानी सिद्धांत-रीति से लगभग चार मिनट का अंतर रहता है, जो हर सीमा तक पहुँचता है। इसलिए चौघड़िया की शुरुआत या अंत के ठीक पास काम न रखें।

दोनों का जन्म-विवरण भरिए

तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।

अभी मिलान कीजिए