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विवाह में मंगल

मांगलिक दोष

मंगल यदि लग्न, चंद्र या शुक्र से पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो कुंडली मांगलिक कहलाती है। दक्षिण भारत में पाँचवाँ भाव भी गिना जाता है।

मांगलिक का मांगलिक से — दोष कट जाता है

यह मिलान का सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला प्रश्न है। शास्त्र का नियम सीधा है: यदि दोनों की कुंडली में मंगल दोष है, तो वह परस्पर निरस्त हो जाता है। एक ओर दोष हो और दूसरी ओर न हो — तब वह शेष रहता है और उपाय अपेक्षित हैं।

दोनों मांगलिक

दोष परस्पर कट जाता है। इस दृष्टि से मिलान निर्दोष।

एक मांगलिक

दोष शेष रहता है। तीव्रता देखकर शास्त्रीय उपाय कीजिए।

कोई नहीं

यह प्रश्न ही नहीं उठता।

मंगल किस भाव में — और उसका अपना फल

मंगल दोष तब बनता है जब मंगल इनमें से किसी भाव में बैठे। पर हर भाव का फल अलग है — सप्तम सबसे तीव्र, द्वितीय सबसे हल्का। और यह देखना केवल लग्न से नहीं, चंद्र और शुक्र से भी होता है; तीनों में से किसी एक से भी बने तो दोष गिना जाता है। यही वजह है कि केवल लग्न देखने वाली गणना अक्सर आधी रह जाती है।

भावमंगल वहाँ हो तोकिस परंपरा में
1तेज़ और ऊर्जावान स्वभाव — कभी-कभी जल्दी गुस्सा; बात कहने में धैर्य रखें तो जीवनसाथी से तालमेल अच्छा रहता है।उत्तर व दक्षिण
2वाणी में तीखापन और परिवार की धन-व्यवस्था पर ध्यान — मीठी वाणी और मिलकर हिसाब रखने से सधता है।उत्तर व दक्षिण
4घर की शांति और ससुराल से तालमेल पर ध्यान — घर के निर्णय मिलकर लें; स्थान-परिवर्तन कुछ अधिक हो सकते हैं।उत्तर व दक्षिण
5संतान और प्रेम-भाव में थोड़ी अधीरता (दक्षिण भारतीय गणना) — धैर्य और स्नेह से सधता है।केवल दक्षिण
7सीधे जीवनसाथी के भाव पर — विवाह में कुछ देरी और स्वभाव की तेज़ी; धैर्य, संवाद और मंगल-उपाय से सहज होता है (असर यहीं सबसे ज़्यादा)।उत्तर व दक्षिण
8आठवाँ भाव विवाह-बंधन की गहराई (मांगल्य) का है — यहाँ मंगल अचानक बदलावों में धैर्य और धन-व्यवस्था पर सजगता माँगता है; हनुमान-उपासना और आपसी भरोसा इसे सँभालते हैं।उत्तर व दक्षिण
12बारहवाँ भाव शय्या-सुख और व्यय का है — ख़र्च और एक-दूसरे के लिए समय पर ध्यान; आपसी खुलापन इसे सँभालता है।उत्तर व दक्षिण

कब यह दोष रद्द हो जाता है

शास्त्र दोष गिनाने के साथ उसके निवारण भी गिनाता है, और दो बातों में साफ़ फ़र्क़ रखता है — कुछ नियम दोष को पूरी तरह रद्द करते हैं, कुछ केवल उसकी तीव्रता घटाते हैं। इन्हें एक मान लेना बड़ी भूल है: उससे मांगलिक कुंडलियाँ ग़लती से निर्दोष पढ़ी जाती हैं।

कबकिन राशियों मेंक्या होता है
मंगल अपनी राशि मेंमेष / वृश्चिकदोष रद्द
मंगल उच्च कामकरदोष रद्द
सप्तम भाव में मंगल, अपनी ही राशि मेंमेष / वृश्चिकदोष रद्द
सप्तम भाव में मंगल, इन राशियों मेंकर्क · सिंह · धनु · मीनदोष रद्द
दोनों मांगलिकवर और वधू, दोनों की कुंडली मेंपरस्पर निरस्त

ये पूरी तरह रद्द नहीं करते, केवल तीव्रता घटाते हैं — शास्त्र दोनों को अलग रखता है:

कबक्योंक्या होता है
मंगल द्विस्वभाव राशि मेंमिथुन · कन्या · धनु · मीनतीव्रता कम
मंगल पर बृहस्पति की युति या दृष्टिगुरु शुभ ग्रह हैप्रभाव न्यून
मंगल चंद्र के साथमन की कोमलतामध्यम कमी
मंगल बुध के साथबुद्धि का संयमकोमलता

और यह तीव्रता घटाता नहीं, बढ़ाता है:

कबक्योंक्या होता है
मंगल पर शनि की दृष्टिबृहत् पाराशर होरा शास्त्र 27.31तीव्रता बढ़ती है

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अपनी ही कुंडली में निरस्त होने के नियम

कई बार मंगल दोष दूसरी कुंडली की ज़रूरत के बिना, अपनी ही कुंडली के शास्त्रीय नियमों से क्षीण या निष्क्रिय हो जाता है — जैसे मंगल का अपनी या उच्च राशि में होना, गुरु या शुक्र की दृष्टि, अथवा कुछ विशेष राशियों में स्थिति। हमारा मिलान इन निरसन-कारकों की भी जाँच करता है और बताता है कि कौन-सा लागू हुआ।

हर मांगलिक कुंडली में दोष सक्रिय नहीं होता। तीव्रता, निरसन और दूसरी कुंडली — तीनों देखे बिना निर्णय मत कीजिए।

दोनों का जन्म-विवरण भरिए

तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।

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