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कुंडली मिलान

आम प्रश्न

कुंडली मिलान को लेकर जो सबसे ज़्यादा पूछा जाता है।

गुण और गिनती

कुंडली मिलान में कितने गुण चाहिए?

18 से कम गिनती कम मानी जाती है, 18–24 मध्यम, 25–32 अच्छा और 33–36 उत्तम माना जाता है। पर केवल गिनती काफ़ी नहीं — नाड़ी, भकूट और गण का शून्य आना अलग से देखा जाना चाहिए।

क्या कम गुण मिलने पर विवाह नहीं हो सकता?

यह अंतिम निर्णय नहीं है। कई बार दोष शास्त्रीय नियमों से निरस्त हो जाते हैं और उपायों से सामंजस्य बढ़ता है। योग्य ज्योतिषी से पूर्ण कुंडली-मिलान अवश्य कराइए।

दो ज्योतिषियों के गुण अलग-अलग क्यों आते हैं?

फ़र्क़ आम तौर पर तीन जगहों पर पड़ता है। पहला, अयनांश — हम लाहिड़ी (चित्रपक्ष) लेते हैं, जो भारत सरकार का मानक है; कोई रमन या केपी ले तो चंद्र का नक्षत्र एक आगे-पीछे हो सकता है। दूसरा, वश्य में धनु और मकर के लिए चंद्र का अंश देखना पड़ता है, जो बहुत से गणक नहीं देखते। तीसरा, नाड़ी और भकूट के निवारण — कोई पूरे अंक लौटा देता है, कोई आधे। हमने हर कूट के पन्ने पर साफ़ लिख दिया है कि हम कहाँ और क्यों अलग चलते हैं।

36 में से 36 गुण मिलना अच्छा है?

पूरे 36 गुण तभी आते हैं जब आठों कूट पूरे मिलें — गण एक-सा, भकूट शुभ दूरी पर, और नाड़ी अलग-अलग (एक ही नाड़ी पर नाड़ी कूट के 0 अंक आते हैं)। ऐसा बहुत कम जोड़ियों में होता है। 36 गुण अच्छे हैं, पर फ़ैसला अकेले अंक से नहीं होता — मांगलिक, दोनों की पूरी कुंडली और दशा भी साथ देखी जाती हैं।

मिलान किस चीज़ पर होता है — पूरी कुंडली पर?

अष्टकूट के 36 गुण केवल चंद्र-राशि और जन्म-नक्षत्र पर बनते हैं। पूरी कुंडली (सप्तम भाव, नवांश, दशा, मांगलिक स्थिति) अलग से देखी जाती है और उतनी ही ज़रूरी है।

गुण कम हैं पर बाक़ी सब ठीक लग रहा है — किसकी सुनें?

यही सबसे ज़रूरी सवाल है, और शास्त्र इसका उत्तर देता है: गुण अकेला प्रमाण नहीं है। हमारी रिपोर्ट अड़तीस बातों को भार-सहित तोलती है, और छत्तीसों गुण मिलकर उनमें से एक ही बात हैं — पूरे निर्णय का लगभग साढ़े तीन प्रतिशत। सप्तम भाव, नवांश, कारक ग्रहों का बल, दशा-काल — ये सब मिलकर बाक़ी तय करते हैं। इसीलिए कम गुण देखकर यह रिपोर्ट कभी विवाह से मना नहीं करती।

दोष और उनके निवारण

मांगलिक लड़की का विवाह ग़ैर-मांगलिक लड़के से हो सकता है?

हाँ। पहले यह देखा जाता है कि दोष सचमुच खड़ा है या नहीं। मंगल अपनी ही राशि में हो, उच्च का हो, या सप्तम में कर्क, सिंह, धनु या मीन में बैठा हो — तो दोष रद्द ही हो जाता है। गुरु की दृष्टि हो, राशि द्विस्वभाव हो, या चंद्र-शनि-बुध का साथ हो — तो तीव्रता घटती है। दोनों मांगलिक हों तो शास्त्र इसे परस्पर निरस्त मानता है। हमारी गणना ये सब अपने आप देखती है, और मांगलिक भी अड़तीस मतों में एक ही मत है — अकेले यह विवाह की रुकावट नहीं।

मांगलिक दोष के उपाय — कुंभ विवाह वग़ैरह ज़रूरी हैं?

हम उपाय नहीं बेचते, और डर दिखाकर कुछ नहीं कराते। शास्त्र में उपाय लिखे हैं, पर हमारी रिपोर्ट का काम इतना है कि आपको सच बता दे — दोष है या नहीं, वह लग्न, चंद्र और शुक्र में से किस-किस से बन रहा है, और कौन-सा निवारण अपने आप लग रहा है। बहुत बार निवारण पहले से लगा होता है और करने को कुछ बचता ही नहीं। आगे कुछ करना है या नहीं, यह आपका और आपके ज्योतिषी का फ़ैसला है।

नाड़ी दोष हो तो क्या करें?

पहले देखिए कि दोष पूरा खड़ा है या क्षीण। तीन शास्त्रीय छूटें हैं — चंद्र-राशि एक व नक्षत्र अलग, नक्षत्र एक व राशि अलग, या नक्षत्र एक व पद अलग। इनमें कोई लगे तो शास्त्र दोष को क्षीण मानता है — हम आठ में से चार अंक देते हैं, पूरे आठ नहीं, और यह बात रिपोर्ट में साफ़ लिखी रहती है। नाड़ी अष्टकूट का सबसे भारी कूट है, यह सच है, और निर्णय में इसका अपना अलग मत भी है। पर वह भी अड़तीस में एक ही मत है। रिपोर्ट आपको यह बताती है कि बाक़ी सैंतीस क्या कह रहे हैं — और फ़ैसला उसी पूरी तस्वीर पर होना चाहिए।

भकूट दोष कितना गंभीर है?

भकूट सात गुणों का है — नाड़ी से हल्का, पर हल्का कहा नहीं जा सकता। शून्य तब आता है जब दोनों की चंद्र-राशियों में 2-12, 6-8 या 5-9 का अंतर हो। इसके तीन निवारण हैं: दोनों की राशि एक हो, नक्षत्र-स्वामी एक हो, या राशि-स्वामी आपस में मित्र हों। कोई एक भी लगे तो पूरे सात अंक लौट आते हैं। निवारण न लगे तो हम इसे छिपाते नहीं — अट्ठाईस गुण मिलने पर भी रिपोर्ट में अलग से लिखा जाता है।

लड़का-लड़की की राशि या नक्षत्र एक ही हो तो?

एक ही राशि होना आम तौर पर अच्छा माना गया है — भकूट पूरे सात देता है, और नाड़ी दोष हो तो यह उसे भी क्षीण कर देता है। एक ही नक्षत्र होने पर बात नक्षत्र के पाद पर आ जाती है: पाद अलग-अलग हों तो शास्त्र इसे स्वीकार करता है। हमारी गणना नक्षत्र-पाद अलग से पढ़ती है, इसलिए यह फ़र्क़ रिपोर्ट में दिखता है, दबता नहीं।

जन्म-विवरण कितना सही चाहिए

जन्म का समय याद न हो तो मिलान हो सकता है?

हो सकता है। समय न भरें तो हम दोपहर 12:00 का लग्न मानते हैं, और यह बात रिपोर्ट के हर उस खंड पर लिखी जाती है जो लग्न, भाव, नवांश या दशा से बनता है — मांगलिक का लग्न-फ़्रेम तब देखा ही नहीं जाता, केवल चंद्र और शुक्र से। निर्णय में भी उन गणनाओं का भार घटा दिया जाता है, ताकि अनुमान तथ्य जितना न तौला जाए; जो गणनाएँ समय से नहीं बदलतीं — छत्तीस गुण, नाड़ी, भकूट, गण — वही तब भारी रहती हैं। फिर भी सटीकता कम रहती है, क्योंकि चंद्र घंटे भर में लगभग आधा अंश चलता है और नक्षत्र बदल जाए तो 36 में से 21 गुण बदल जाते हैं।

जन्म-समय में कितनी भूल चल जाती है?

यह इस पर है कि चंद्र संधि से कितनी दूर खड़ा है। चंद्र दिन भर में क़रीब तेरह अंश चलता है, यानी एक नक्षत्र पार करने में लगभग चौबीस घंटे — इसलिए बीस-पचीस मिनट की भूल से नक्षत्र आम तौर पर नहीं बदलता। पर चंद्र अगर संधि के पास हो तो चंद मिनट भी बदल सकते हैं। इसीलिए हमारी रिपोर्ट यह अलग से बताती है — दोनों का चंद्र संधि से कितनी दूर है, और वह दूरी मिनटों में कितनी बनती है।

जन्म-स्थान की जगह अभी का शहर डाल दें तो?

नहीं, उससे मिलान ग़लत हो जाएगा। जन्म-स्थान से लग्न और भाव बनते हैं, और लग्न हर दो घंटे में राशि बदल लेता है — कुछ सौ किलोमीटर का फ़र्क़ भी उसे बदल सकता है। जन्म का असली शहर ही डालिए। वह सूची में न मिले तो सबसे पास का बड़ा शहर लीजिए; पचास-सौ किलोमीटर का अंतर आम तौर पर चल जाता है।

विदेश में जन्म हुआ हो तो?

हाँ, हो जाएगा। सूची में अब खाड़ी, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड, सिंगापुर-मलेशिया, पूर्वी अफ़्रीका, दक्षिण अफ़्रीका, मॉरिशस, फ़िजी और कैरीबियाई देशों के शहर भी हैं। हर शहर के साथ उसका अपना समय-क्षेत्र जुड़ा है, और अंतर जन्म की अपनी तारीख़ पर निकाला जाता है — यह ज़रूरी है, क्योंकि कई देशों में गर्मियों का समय अलग होता है। न्यूयॉर्क जुलाई में −4 रहता है और जनवरी में −5; कोलंबो एक दौर में +6 भी रहा। पुराने नियम भी इसमें आ जाते हैं, इसलिए दशकों पुराना जन्म भी सही बैठता है।

कौन-सा पंचांग या अयनांश इस्तेमाल होता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश — भारत सरकार का मानक और सबसे ज़्यादा चलने वाला। ग्रहों की स्थिति स्विस एफ़ेमेरिस से आती है, यानी वही गणित जो पेशेवर ज्योतिषी के सॉफ़्टवेयर में चलता है। कोई और अयनांश लेने वाले गणक से नक्षत्र कभी-कभी एक आगे-पीछे बैठ सकता है — गुण तभी अलग आते हैं।

विवाह, रिपोर्ट और यह सेवा

प्रेम विवाह में भी कुंडली मिलान ज़रूरी है?

“ज़रूरी” शब्द हम नहीं कहेंगे। मिलान एक जानकारी है, अनुमति-पत्र नहीं। अगर आप दोनों तय कर चुके हैं, तो मिलान का काम बस इतना है कि कहाँ स्वभाव आपस में मिलते हैं और कहाँ थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा, यह पहले से पता चल जाए। हमारी रिपोर्ट किसी को विवाह से मना नहीं करती — न कम गुण पर, न किसी दोष पर।

दूसरा विवाह हो तो मिलान कैसे होता है?

गणना वही रहती है — दोनों का जन्म-विवरण, और अष्टकूट व बाक़ी सब वैसे ही बनते हैं। रिपोर्ट में सप्तम भाव, दार-पद और कलत्र-कारक अलग से पढ़े जाते हैं, जो इस स्थिति में और भी काम के हैं। उम्र या पिछले विवाह की जानकारी हम माँगते नहीं और वह गणना में जाती भी नहीं।

रिपोर्ट में क्या-क्या आता है?

मिलान की रिपोर्ट क़रीब अट्ठाईस पन्ने की होती है — छत्तीस गुण, आठों कूट अलग-अलग, मांगलिक मिलान, पाप साम्य, नाड़ी-भकूट-गण के दोष और उनके निवारण, विवाह-काल, और जन्म-समय कितनी भूल सह सकता है। पूरी रिपोर्ट लें तो दोनों की अपनी कुंडली भी साथ आती है और वह चालीस पन्ने के आसपास पहुँच जाती है।

दोनों का जन्म-विवरण भरिए

तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।

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