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सबसे भारी कूट

नाड़ी, भकूट और गण दोष

अष्टकूट के छत्तीस गुणों में नाड़ी के आठ और भकूट के सात — सबसे भारी दो कूट यही हैं। और यही दो ऐसे हैं जिनका शून्य आना गुणों की संख्या से नहीं कटता।

नाड़ी दोष

सत्ताईस नक्षत्र तीन नाड़ियों में बँटे हैं — आदि, मध्य और अन्त्य। वर और वधू की नाड़ी अलग हो तो पूरे आठ गुण मिलते हैं; एक ही हो तो शून्य, और उसे नाड़ी दोष कहते हैं। आयुर्वेद की वात-पित्त-कफ की धारणा इसी के पीछे है, इसीलिए इसे स्वास्थ्य और संतान-सुख से जोड़ा गया है।

निवारण: दोनों की चंद्र-राशि एक हो और नक्षत्र अलग हों, तो शास्त्र इसे आंशिक निरसन मानता है — दोष क्षीण होता है, पूरी तरह मिटता नहीं। पूरे निरसन के लिए योग्य ज्योतिषी से जाँच और नाड़ी-निवारण अपेक्षित है।

कौन-सा नक्षत्र किस नाड़ी में

सत्ताईस नक्षत्र तीन नाड़ियों में नौ-नौ बँटे हैं। आयुर्वेद की वात-पित्त-कफ की धारणा इसी के पीछे है, और इसीलिए नाड़ी को स्वास्थ्य और संतान से जोड़ा गया — यही वजह है कि इसे अष्टकूट का सबसे भारी कूट माना गया और इसके आठ गुण रखे गए। अपना नक्षत्र यहाँ देखकर आप स्वयं जान सकते हैं कि दोनों की नाड़ी एक है या भिन्न।

नाड़ीआयुर्वेद मेंइसके नौ नक्षत्र
आदिवात — वायु1. अश्विनी · 6. आर्द्रा · 7. पुनर्वसु · 12. उत्तराफाल्गुनी · 13. हस्त · 18. ज्येष्ठा · 19. मूल · 24. शतभिषा · 25. पूर्वाभाद्रपद
मध्यपित्त — अग्नि2. भरणी · 5. मृगशिरा · 8. पुष्य · 11. पूर्वाफाल्गुनी · 14. चित्रा · 17. अनुराधा · 20. पूर्वाषाढ़ा · 23. धनिष्ठा · 26. उत्तराभाद्रपद
अन्त्यकफ — जल3. कृत्तिका · 4. रोहिणी · 9. आश्लेषा · 10. मघा · 15. स्वाति · 16. विशाखा · 21. उत्तराषाढ़ा · 22. श्रवण · 27. रेवती

भकूट दोष

दोनों की चंद्र-राशियों के बीच की दूरी देखी जाती है। 6-8, 2-12 और 5-9 — ये तीन अंतर दोष-प्रवण माने गए हैं। पर तीन शास्त्रीय अपवाद भी हैं, और उनमें से कोई एक लागू हो तो दोष निरस्त हो जाता है:

एक ही राशि

दोनों का चंद्र एक ही राशि में हो।

एक नक्षत्र-स्वामी

दोनों नक्षत्रों का स्वामी ग्रह एक हो।

मित्र राशि-स्वामी

दोनों राशियों के स्वामी आपस में मित्र हों।

गण दोष

मनुष्य-गण और राक्षस-गण का मेल शून्य गुण देता है और गंभीर माना जाता है। भकूट की तरह इसके भी वही तीन अपवाद लागू होते हैं — एक ही चंद्र-राशि, एक नक्षत्र-स्वामी, या मित्र राशि-स्वामी।

ज़रूरी बात: 28 गुण मिलने पर भी यदि नाड़ी, भकूट या गण अनिरस्त है, तो उसे निर्बाध स्वीकृति मत समझिए। हमारा मिलान इन तीनों की अलग जाँच करके परिणाम में साफ़ लिखता है।

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दोनों का जन्म-विवरण भरिए

तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।

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