किस राशि की शादी किस राशि से होगी — इसका शास्त्रीय जवाब चंद्र राशि से निकलता है, सूर्य राशि से नहीं। दोनों चंद्र राशियों की आपसी दूरी (भकूट) और उनके स्वामी ग्रहों की दोस्ती (ग्रह मैत्री) मिलकर 36 में से 12 गुण तय करते हैं। बारह राशियों की 78 संभव जोड़ियों में से 34 को ये पूरे 12 मिलते हैं। वर्ण और वश्य मिलाकर राशि कुल 15 गुण तय करती है; बाक़ी 21 गुण जन्म-नक्षत्र से आते हैं।
गूगल पर 'kis rashi ki shadi kis rashi se hogi' पूछने पर ज़्यादातर पन्ने "सबसे अच्छी तीन राशियाँ" जैसी सूची दे देते हैं, बिना नियम बताए। यहाँ कुंडली मिलान ज्योतिष की टीम ने अपने मिलान-इंजन से सभी 144 राशि-जोड़ियों के अंक निकाले हैं, और हर अंक का कारण भी लिखा है।
वैदिक ज्योतिष में राशि का अर्थ — चंद्र राशि
वैदिक ज्योतिष में "आपकी राशि" वह है, जिसमें जन्म के क्षण चंद्रमा था। विवाह का मिलान इसी पर टिका है, क्योंकि चंद्रमा मन का कारक है और शादी दो मनों का रोज़ का साथ है।
पत्रिकाओं में छपने वाली "Aries, Leo" जैसी राशि सूर्य से तय होती है। सूर्य एक राशि में लगभग एक महीना रहता है, चंद्रमा सिर्फ़ सवा दो दिन — इसलिए एक ही महीने में जन्मे दो लोगों की सूर्य राशि एक हो सकती है, पर चंद्र राशि अक्सर अलग निकलती है। ऊपर से पश्चिमी पद्धति ऋतुओं से बँधा राशिचक्र लेती है, और वैदिक पद्धति तारों से बँधा निरयन चक्र (हमारी गणना लाहिरी अयनांश से)।
अपनी चंद्र राशि कैसे पता करें
जन्म-तिथि, समय और स्थान से बनी कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में है, वही आपकी राशि है। समय कुछ घंटे आगे-पीछे हो, तब भी ज़्यादातर राशि नहीं बदलती। पर समय बिल्कुल पता न हो तो सावधानी चाहिए — क़रीब 44% दिनों में चंद्रमा दिन में किसी समय राशि बदलता है। ऐसे में हमारा विवाह-मिलान बताता है कि उस दिन चंद्रमा एक ही नक्षत्र में रहा या बदला, और बदला हो तो समय मिलते ही दोबारा मिलान कराने को कहता है। जन्म-नक्षत्र से भी राशि निकलती है। नाम के पहले अक्षर वाली राशि सिर्फ़ अनुमान है, जो तभी सही है जब नाम जन्म-नक्षत्र के अक्षर से रखा गया हो।
राशि मिलान से 36 में से कितने गुण बनते हैं
अष्टकूट मिलान में आठ कूट (कसौटियाँ) और कुल 36 गुण हैं। जो लोग 'rashi milan in hindi' खोजकर नियम समझना चाहते हैं, उनके लिए मूल बात यह है कि सिर्फ़ दो कूट पूरी तरह राशियों की जोड़ी से तय होते हैं, चाहे कौन-सी राशि वर की हो:
- भकूट — 7 गुण: दोनों चंद्र राशियों की आपसी दूरी।
- ग्रह मैत्री — 5 गुण: दोनों राशि-स्वामी ग्रहों की दोस्ती।
ये राशि के दो बड़े कूट हैं, और इन्हीं के 12 गुण इस लेख की सारणी में हैं। वर्ण (1) और वश्य (2) भी चंद्र राशि से ही तय होते हैं, पर उनमें यह देखा जाता है कि कौन-सी राशि वर की है और कौन-सी वधू की; वश्य में धनु और मकर आधे-आधे बँटे हैं। सीधी बात: राशि 36 में से 15 गुण तय करती है, और बाक़ी 21 — तारा (3), योनि (4), गण (6), नाड़ी (8) — जन्म-नक्षत्र से आते हैं।
भकूट — दोनों राशियों की दूरी का नियम
भकूट (राशि-कूट) में अपनी चंद्र राशि को 1 गिनकर साथी की राशि तक गिनिए, फिर साथी की राशि से अपनी तक। मेष से सिंह पाँचवीं राशि है और सिंह से मेष नौवीं — यह जोड़ी 5/9 हुई। दोनों संख्याओं का जोड़ हमेशा 14 आता है।
| दूरी | नाम | भकूट | परंपरा का संकेत |
|---|---|---|---|
| 1/1 | एक ही राशि | 7 | शुभ |
| 2/12 | द्विर्द्वादश | दोष | पैसे और ख़र्च की सोच |
| 3/11 | त्रि-एकादश | 7 | शुभ |
| 4/10 | चतुर्थ-दशम | 7 | शुभ |
| 5/9 | नवपंचम | दोष | संतान और जीवन-दृष्टि |
| 6/8 | षडाष्टक | दोष | रोज़ का तालमेल |
| 7/7 | समसप्तक (आमने-सामने) | 7 | शुभ |
दोष वाली दूरी पर छूट न मिले तो भकूट के 0 अंक, छूट मिले तो पूरे 7। दोष का अर्थ यह नहीं कि रिश्ता नहीं चलेगा — बस उस क्षेत्र में ज़्यादा समझदारी चाहिए।
भकूट दोष की छूट — कब दोष नहीं गिना जाता
हमारा इंजन मुहूर्त-ग्रंथों की परंपरा से भकूट दोष की तीन छूट (परिहार) मानता है:
- दोनों राशियों का स्वामी एक हो — जैसे मेष-वृश्चिक (मंगल), वृषभ-तुला (शुक्र), मकर-कुंभ (शनि)।
- दोनों राशि-स्वामी मित्र हों — हमारी गणना में तभी, जब ग्रह मैत्री के 4 या 5 अंक बनें। एक ओर से शत्रुता हो, तो छूट नहीं।
- दोनों के जन्म-नक्षत्र का स्वामी एक हो — यह नक्षत्र से दिखता है, इसलिए पूरे मिलान में ही।
नतीजा दिलचस्प है। नवपंचम जोड़ियाँ हमेशा एक ही तत्व की होती हैं (जैसे अग्नि की मेष-सिंह-धनु), और हर तत्व के स्वामी आपस में मित्र-भाव रखते हैं — इसलिए बारहों नवपंचम जोड़ियों को छूट मिलती है। दोष वाली दूरी की 36 जोड़ियों में से 25 को राशि-स्वामी से छूट है; सिर्फ़ 11 में भकूट दोष बचता है। उन 11 में भी हर एक के लिए एक नक्षत्र-मेल है जिसमें दोनों नक्षत्रों का स्वामी एक हो जाता है — वह हर राशि के खंड में लिखा है। नक्षत्र एक ही हो तो नाड़ी भी एक होती है; उसे पूरा मिलान अलग तौलता है।
ग्रह मैत्री — दोनों राशि-स्वामियों की दोस्ती
ग्रह मैत्री में देखा जाता है कि आपकी राशि का स्वामी साथी के राशि-स्वामी को मित्र, सम (तटस्थ) या शत्रु मानता है — और साथी का स्वामी आपके स्वामी को कैसा। यह नैसर्गिक मित्रता बृहत्पाराशर होराशास्त्र में दी गई है, और दोनों ओर से एक जैसी नहीं होती। चंद्रमा बुध को मित्र मानता है, पर बुध चंद्रमा को शत्रु — इसीलिए कर्क की मिथुन या कन्या से मैत्री सिर्फ़ 1 अंक की है।
| एक ओर से | दूसरी ओर से | अंक |
|---|---|---|
| मित्र (या एक ही स्वामी) | मित्र | 5 |
| मित्र | सम | 4 |
| सम | सम | 3 |
| मित्र | शत्रु | 1 |
| सम | शत्रु | ½ |
| शत्रु | शत्रु | 0 |
मैत्री को स्वभाव की सहजता की तरह पढ़िए, प्यार के नाप की तरह नहीं।
राशि मिलान चार्ट — बारहों राशियाँ एक नज़र में
यह राशि मिलान चार्ट हमारे इंजन की गणना से है: भकूट 7 + ग्रह मैत्री 5 = 12। 'rashi milan chart' खोजने पर अक्सर बस हरे-लाल ख़ाने मिलते हैं; यहाँ हर ख़ाने का नियम ऊपर लिखा है।
| राशि (स्वामी) | पूरे 12 अंक | 10–11 अंक | भकूट दोष, राशि से छूट नहीं |
|---|---|---|---|
| मेष (मंगल) | मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन | कर्क (11), तुला (10) | वृषभ, कन्या |
| वृषभ (शुक्र) | वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, कुंभ | वृश्चिक (10) | मेष, धनु |
| मिथुन (बुध) | मिथुन, वृषभ, कन्या, तुला | सिंह, मकर, कुंभ (11) | कर्क, वृश्चिक |
| कर्क (चंद्र) | कर्क, सिंह | मेष, वृश्चिक, धनु, मीन (11) | मिथुन, कुंभ |
| सिंह (सूर्य) | सिंह, मेष, कर्क, वृश्चिक, धनु, मीन | मिथुन, कन्या (11) | मकर |
| कन्या (बुध) | कन्या, वृषभ, मिथुन, तुला | सिंह, मकर, कुंभ (11) | मेष |
| तुला (शुक्र) | तुला, वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर, कुंभ | मेष (10) | वृश्चिक, मीन |
| वृश्चिक (मंगल) | वृश्चिक, मेष, सिंह, धनु, मीन | कर्क (11), वृषभ (10) | मिथुन, तुला |
| धनु (गुरु) | धनु, मेष, सिंह, वृश्चिक, मीन | कर्क (11), कुंभ (10) | वृषभ, मकर |
| मकर (शनि) | मकर, वृषभ, तुला, कुंभ | मिथुन, कन्या (11), मीन (10) | सिंह, धनु |
| कुंभ (शनि) | कुंभ, वृषभ, तुला, मकर | मिथुन, कन्या (11), धनु (10) | कर्क, मीन |
| मीन (गुरु) | मीन, मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु | कर्क (11), मकर (10) | कुंभ, तुला |
जो राशि किसी कॉलम में नहीं है, उसके साथ 7 से 8 अंक बनते हैं — भकूट पूरा, मैत्री कम। हर खंड के अंत में चंद्र राशि से सातवीं राशि के आधार पर जीवनसाथी का संकेत है; पूरी तस्वीर लग्न से सातवाँ भाव, शुक्र-गुरु और नवांश देते हैं।
मेष राशि की शादी किस राशि से होगी
मेष का स्वामी मंगल है। 'mesh rashi ki shadi kis rashi se hogi' का सीधा जवाब: मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन के साथ राशि के पूरे 12 अंक बनते हैं। सिंह (सूर्य) और धनु (गुरु) से नवपंचम है, पर मंगल-सूर्य और मंगल-गुरु पक्के मित्र हैं, इसलिए छूट। वृश्चिक से षडाष्टक है, पर दोनों का स्वामी मंगल ही है। मीन से द्विर्द्वादश है, पर गुरु मंगल का मित्र है।
कर्क से 11 अंक — मंगल चंद्रमा को मित्र मानता है, चंद्रमा मंगल को सम। तुला सामने की राशि है: भकूट पूरा, मैत्री 3, कुल 10। मिथुन, मकर और कुंभ से 7.5 — भकूट पूरा, मैत्री आधा अंक।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: वृषभ (द्विर्द्वादश; मंगल-शुक्र आपस में सम, 3 अंक) और कन्या (षडाष्टक; मंगल बुध को शत्रु मानता है, ½)। ये अंक 12 में से हैं, 36 में से नहीं। पूरे मिलान में मेष और वृषभ, दोनों का नक्षत्र कृत्तिका हो — या कन्या वाले का उत्तरा फाल्गुनी, जिसका स्वामी भी सूर्य है — तो भकूट दोष की छूट मिल जाती है।
जीवनसाथी का स्वभाव: मेष से सातवीं राशि तुला (शुक्र) है — सलीका, संतुलन और बराबरी पसंद करने वाला साथी, जो मेष की तेज़ी को ठहराव दे। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
वृषभ राशि की शादी किस राशि से होगी
वृषभ का स्वामी शुक्र है, और शुक्र के मित्र बुध और शनि हैं। वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ — छह राशियों के साथ पूरे 12 अंक। मिथुन (द्विर्द्वादश) और कन्या (नवपंचम) बुध की राशियाँ हैं, मकर (नवपंचम) शनि की — तीनों में मैत्री से छूट। तुला से षडाष्टक है, पर स्वामी दोनों का शुक्र। कुंभ से 4/10 शुभ है, और शुक्र-शनि की मैत्री 5।
वृश्चिक सामने की राशि है — कुल 10। कर्क और मीन से 7.5: शुक्र चंद्रमा को शत्रु मानता है, और गुरु शुक्र को। सिंह से 7 — दूरी शुभ, पर शुक्र और सूर्य एक-दूसरे को शत्रु मानते हैं।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: मेष (द्विर्द्वादश, 3 अंक) और धनु (षडाष्टक, ½)। कृत्तिका नक्षत्र मेष और वृषभ दोनों में फैला है; दोनों का नक्षत्र कृत्तिका हो, तो मेष-वृषभ का भकूट दोष पूरे मिलान में छूट जाता है। धनु के साथ: वृषभ वाले का कृत्तिका और धनु वाले का उत्तराषाढ़ा — दोनों सूर्य के — हो, तो छूट।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि वृश्चिक (मंगल) है — गहराई से जुड़ने वाला, भीतर से दृढ़ और कही बात पर टिका रहने वाला साथी। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
मिथुन राशि की शादी किस राशि से होगी
मिथुन बुध की राशि है। पूरे 12 अंक मिथुन, वृषभ, कन्या और तुला के साथ बनते हैं। कन्या का स्वामी भी बुध है और दूरी 4/10 शुभ। वृषभ (द्विर्द्वादश) और तुला (नवपंचम) शुक्र की राशियाँ हैं; बुध-शुक्र परस्पर मित्र हैं, इसलिए छूट पक्की।
11 अंक: सिंह (3/11 शुभ; बुध सूर्य को मित्र मानता है, सूर्य बुध को सम), और शनि की राशियाँ मकर (षडाष्टक) व कुंभ (नवपंचम) — शनि बुध को मित्र मानता है, बुध शनि को सम, इसलिए छूट। मेष, धनु और मीन से 7.5 — मंगल और गुरु दोनों बुध को शत्रु मानते हैं।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: कर्क (द्विर्द्वादश, 1 अंक) और वृश्चिक (षडाष्टक, ½)। कर्क के साथ: चंद्रमा बुध को मित्र मानता है, पर बुध चंद्रमा को शत्रु — एक-तरफ़ा दोस्ती पर छूट नहीं। फिर भी पुनर्वसु नक्षत्र दोनों राशियों में आता है; दोनों का नक्षत्र पुनर्वसु हो, तो पूरा मिलान छूट देता है। वृश्चिक के साथ: मिथुन वाले का पुनर्वसु और वृश्चिक वाले का विशाखा (दोनों गुरु के) हो, तो छूट।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि धनु (गुरु) है — उसूलों वाला, खुले मन का, सीखने-सिखाने और घूमने में रुचि रखने वाला साथी। मिथुन की चंचल बुद्धि को धनु दिशा देता है। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
कर्क राशि की शादी किस राशि से होगी
कर्क का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा किसी ग्रह को शत्रु नहीं मानता, पर उसके मित्र सिर्फ़ सूर्य और बुध हैं — और बुध उसे लौटकर मित्र नहीं मानता। इसलिए कर्क के पूरे 12 अंक सिर्फ़ दो राशियों से बनते हैं: कर्क और सिंह। सिंह से द्विर्द्वादश है, पर चंद्र-सूर्य परस्पर मित्र हैं।
कर्क की असली ताक़त 11 अंक वाली चार जोड़ियाँ हैं: मेष, वृश्चिक, धनु और मीन। मंगल और गुरु चंद्रमा को मित्र मानते हैं, और चंद्रमा उन्हें सम — मैत्री 4। वृश्चिक-मीन से नवपंचम और धनु से षडाष्टक है, पर यही मैत्री छूट दिला देती है। कन्या से 8, और वृषभ, तुला, मकर से 7.5।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: मिथुन (द्विर्द्वादश, 1 अंक) और कुंभ (षडाष्टक, ½ — शनि चंद्रमा को शत्रु मानता है)। पूरे मिलान में मिथुन के साथ दोनों का पुनर्वसु नक्षत्र हो, या कुंभ के साथ कर्क वाले का पुनर्वसु और कुंभ वाले का पूर्वा भाद्रपद (दोनों गुरु के) हो, तो छूट मिल जाती है। छूट न भी मिले, तो यह 36 में से 7 अंकों की बात है।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि मकर (शनि) है — ज़िम्मेदार, व्यावहारिक, धीरे-धीरे पर पक्का निभाने वाला साथी। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
सिंह राशि की शादी किस राशि से होगी
सिंह का स्वामी सूर्य है, जिसके मित्र चंद्र, मंगल और गुरु हैं। 'singh rashi ki shadi kis rashi se hogi' का जवाब सारणी में साफ़ है: सिंह, मेष, कर्क, वृश्चिक, धनु और मीन — छह राशियों से पूरे 12। मेष-धनु से नवपंचम, कर्क से द्विर्द्वादश, मीन से षडाष्टक है, पर हर बार दूसरी राशि का स्वामी सूर्य का मित्र है। वृश्चिक से 4/10 शुभ।
मिथुन और कन्या (बुध) से 11 अंक — बुध सूर्य को मित्र मानता है, सूर्य बुध को सम।
सिंह की एक ख़ास बात: शुक्र और शनि की राशियों के साथ मैत्री शून्य रहती है, क्योंकि सूर्य इन दोनों को शत्रु मानता है और ये सूर्य को। इसलिए वृषभ, तुला और कुंभ के साथ भकूट पूरा होने पर भी कुल 7 आता है।
भकूट दोष वाली जोड़ी: सिर्फ़ एक — मकर (षडाष्टक, मैत्री भी 0)। यह सारणी का सबसे कम अंक है, पर बात 36 में से 12 की है। सिंह वाले का नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी और मकर वाले का उत्तराषाढ़ा हो — दोनों सूर्य के — तो पूरा मिलान भकूट में छूट देता है।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि कुंभ (शनि) है — स्वतंत्र सोच वाला, दोस्त जैसा, बराबरी और अपनी जगह चाहने वाला साथी। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
कन्या राशि की शादी किस राशि से होगी
कन्या भी बुध की राशि है, पर मिथुन से दूरियाँ बदल जाती हैं। पूरे 12 अंक: कन्या, वृषभ, मिथुन और तुला। वृषभ से नवपंचम और तुला से द्विर्द्वादश है — दोनों शुक्र की राशियाँ, और बुध-शुक्र परस्पर मित्र। मिथुन से 4/10 है और स्वामी भी एक।
11 अंक: सिंह (द्विर्द्वादश), मकर (नवपंचम) और कुंभ (षडाष्टक) — तीनों में मैत्री 4 से छूट। कर्क से 8, और वृश्चिक, धनु, मीन से 7.5।
भकूट दोष वाली जोड़ी: सिर्फ़ मेष (षडाष्टक, ½ — मंगल बुध को शत्रु मानता है)। कन्या वाले का नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी और मेष वाले का कृत्तिका हो, तो दोनों नक्षत्रों का स्वामी सूर्य है — पूरे मिलान में भकूट दोष छूट जाता है।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि मीन (गुरु) है — कोमल मन, दया, आस्था और कल्पना वाला साथी। कन्या रिश्ते में हिसाब और बारीकी लाती है, मीन क्षमा और अपनापन। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
तुला राशि की शादी किस राशि से होगी
तुला शुक्र की दूसरी राशि है। 'tula rashi ki shadi kis rashi se hogi' पूछने वालों के लिए सारणी छह नाम देती है: तुला, वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ — पूरे 12 अंक। वृषभ से षडाष्टक है, पर स्वामी एक (शुक्र)। मिथुन से नवपंचम और कन्या से द्विर्द्वादश है, पर बुध शुक्र का मित्र है। कुंभ से नवपंचम है, पर शनि शुक्र का मित्र है। मकर से 4/10 शुभ, मैत्री 5।
मेष सामने की राशि है — कुल 10। कर्क और धनु से 7.5, और सिंह से 7, क्योंकि शुक्र और सूर्य परस्पर शत्रु हैं।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: वृश्चिक (द्विर्द्वादश, 3) और मीन (षडाष्टक, ½)। विशाखा नक्षत्र तुला और वृश्चिक दोनों में फैला है; दोनों का नक्षत्र विशाखा हो, तो पूरा मिलान भकूट दोष की छूट देता है। मीन के साथ: तुला वाले का विशाखा और मीन वाले का पूर्वा भाद्रपद (दोनों गुरु के) हो, तो छूट।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि मेष (मंगल) है — ऊर्जा से भरा, सीधी बात कहने वाला, पहल करने वाला साथी। तुला हर पक्ष तौलती है; मेष जैसा साथी फ़ैसले की हिम्मत देता है। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
वृश्चिक राशि की शादी किस राशि से होगी
वृश्चिक मंगल की दूसरी राशि है। पूरे 12 अंक: वृश्चिक, मेष, सिंह, धनु और मीन। मेष से षडाष्टक है, पर स्वामी एक ही — मंगल। धनु से द्विर्द्वादश और मीन से नवपंचम है, पर मंगल-गुरु परस्पर मित्र हैं। सिंह से 4/10 शुभ है, और मंगल-सूर्य की मैत्री पूरी।
कर्क से 11 अंक — नवपंचम है, पर मैत्री 4 से छूट। वृषभ सामने की राशि है — 10। कन्या, मकर और कुंभ से 7.5।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: तुला (द्विर्द्वादश, 3) और मिथुन (षडाष्टक, ½)। दोनों में बात राशि-स्वामियों पर अटकती है — मंगल और शुक्र आपस में सम हैं, और मंगल बुध को शत्रु मानता है। पूरे मिलान में तुला के साथ दोनों का विशाखा नक्षत्र हो, या मिथुन के साथ वृश्चिक वाले का विशाखा और मिथुन वाले का पुनर्वसु (दोनों गुरु के) हो, तो छूट मिल जाती है।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि वृषभ (शुक्र) है — शांत, स्थिर, धीरज वाला और घर को आराम से भरने वाला साथी। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
धनु राशि की शादी किस राशि से होगी
धनु गुरु की राशि है। पूरे 12 अंक: धनु, मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन। मेष और सिंह से नवपंचम है — एक ही अग्नि तत्व, और मंगल, सूर्य दोनों गुरु के मित्र। वृश्चिक से द्विर्द्वादश है, पर मंगल मित्र है। मीन से 4/10 है और स्वामी भी एक — गुरु।
कर्क से 11 अंक — षडाष्टक है, पर गुरु चंद्रमा को मित्र मानता है और चंद्रमा गुरु को सम, इसलिए छूट। कुंभ से 10 — दूरी 3/11 शुभ, और गुरु-शनि परस्पर सम। मिथुन, कन्या और तुला से 7.5, क्योंकि गुरु बुध और शुक्र को शत्रु मानता है।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: मकर (द्विर्द्वादश, 3) और वृषभ (षडाष्टक, ½)। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र धनु और मकर दोनों में फैला है; दोनों का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा हो, तो पूरा मिलान भकूट दोष की छूट देता है। वृषभ के साथ: धनु वाले का उत्तराषाढ़ा और वृषभ वाले का कृत्तिका (दोनों सूर्य के) हो, तो छूट।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि मिथुन (बुध) है — बातूनी, जिज्ञासु, हँसमुख और हर नई बात में रुचि लेने वाला साथी। सातवीं राशि होने पर भी धनु-मिथुन के राशि-अंक 7.5 हैं — आकर्षण और गुण अलग चीज़ें हैं। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
मकर राशि की शादी किस राशि से होगी
मकर शनि की राशि है, और शनि के मित्र बुध और शुक्र हैं। पूरे 12 अंक: मकर, वृषभ, तुला और कुंभ। वृषभ से नवपंचम है, पर शुक्र मित्र है। तुला से 4/10 शुभ है। कुंभ से द्विर्द्वादश है, पर स्वामी एक ही — शनि।
11 अंक: मिथुन (षडाष्टक) और कन्या (नवपंचम) — दोनों बुध की राशियाँ; शनि बुध को मित्र मानता है और बुध शनि को सम, इसलिए छूट। मीन से 10 (दूरी 3/11 शुभ, शनि-गुरु सम)। मेष, कर्क और वृश्चिक से 7.5।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: धनु (द्विर्द्वादश, 3) और सिंह (षडाष्टक, 0)। सिंह के साथ सूर्य-शनि की पारंपरिक शत्रुता से मैत्री भी शून्य है, पर यह 36 का एक-तिहाई ही है। धनु के साथ दोनों का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र हो, या सिंह के साथ मकर वाले का उत्तराषाढ़ा और सिंह वाले का उत्तरा फाल्गुनी (दोनों सूर्य के) हो, तो पूरे मिलान में भकूट दोष छूट जाता है।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि कर्क (चंद्र) है — ख़याल रखने वाला, भावुक और घर-परिवार से गहरे जुड़ा साथी। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
कुंभ राशि की शादी किस राशि से होगी
कुंभ भी शनि की राशि है, पर सूची अलग है। पूरे 12 अंक: कुंभ, वृषभ, तुला और मकर। वृषभ से 4/10 शुभ है और शुक्र-शनि की मैत्री 5। तुला से नवपंचम है, पर छूट मिलती है। मकर से द्विर्द्वादश है, पर स्वामी एक।
11 अंक: मिथुन (नवपंचम) और कन्या (षडाष्टक) — शनि-बुध की मैत्री 4 से दोनों में छूट। धनु से 10। मेष और वृश्चिक से 7.5। सिंह सामने की राशि है — भकूट पूरा, पर सूर्य-शनि शत्रु, इसलिए कुल 7।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: मीन (द्विर्द्वादश, 3) और कर्क (षडाष्टक, ½)। पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र कुंभ और मीन दोनों में फैला है — दोनों का यही नक्षत्र हो, तो छूट। कर्क के साथ: कुंभ वाले का पूर्वा भाद्रपद और कर्क वाले का पुनर्वसु (दोनों गुरु के) हो, तो पूरा मिलान भकूट दोष नहीं गिनता।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि सिंह (सूर्य) है — आत्मविश्वासी, उदार और गरिमा से जीने वाला साथी, जिसे मान-सम्मान प्यारा है। सिंह-कुंभ के राशि-अंक 7 हैं, यानी दोनों को एक-दूसरे की जगह और मान का ध्यान रखना होगा। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
मीन राशि की शादी किस राशि से होगी
मीन गुरु की दूसरी राशि है। पूरे 12 अंक: मीन, मेष, सिंह, वृश्चिक और धनु। मेष से द्विर्द्वादश (मंगल मित्र), सिंह से षडाष्टक (सूर्य मित्र), वृश्चिक से नवपंचम (मंगल मित्र) — तीनों में छूट। धनु से 4/10 है और स्वामी भी एक।
कर्क से 11 अंक (नवपंचम, मैत्री 4 से छूट)। मकर से 10 (दूरी 3/11, गुरु-शनि सम)। वृषभ, मिथुन और कन्या से 7.5।
भकूट दोष वाली जोड़ियाँ: कुंभ (द्विर्द्वादश, 3) और तुला (षडाष्टक, ½)। कुंभ के साथ दोनों का नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद हो, तो छूट। तुला के साथ: मीन वाले का पूर्वा भाद्रपद और तुला वाले का विशाखा — दोनों गुरु के — हो, तो पूरा मिलान भकूट दोष नहीं गिनता। मीन में पूर्वा भाद्रपद का सिर्फ़ चौथा चरण आता है, इसलिए यह छूट कुछ ही लोगों पर लगती है; बाक़ी के लिए नक्षत्र के 21 गुण और पूरी कुंडली निर्णायक हैं।
जीवनसाथी का स्वभाव: सातवीं राशि कन्या (बुध) है — व्यावहारिक, सलीके वाला, सेवा-भाव से भरा और बारीकी देखने वाला साथी। पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है।
भकूट दोष बचा रहे तो सरल उपाय
पूरे मिलान के बाद भी भकूट दोष बचे, तो दोनों अपनी-अपनी चंद्र राशि के स्वामी ग्रह का बीज मंत्र रोज़ एक माला (108 बार), कम से कम 43 दिन बिना नागा जपें। जैसे सिंह-मकर की जोड़ी में सिंह वाले सूर्य का और मकर वाले शनि का मंत्र:
'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः'
'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः'
सोमवार को दोनों साथ शिव-पार्वती की पूजा करें और जपें:
'ॐ नमः शिवाय'
उपाय सहारा है, गारंटी नहीं। रत्न सिर्फ़ राशि देखकर न पहनें — पहनना हो तो किसी जानकार को पूरी कुंडली दिखाकर ही; जिस ग्रह को शांत करना हो, उसका रत्न उलटा असर कर सकता है।
पूरा मिलान ही फ़ैसला करता है — हमारा विवाह कुंडली मिलान
जो लोग 'rashi milan for marriage' खोजते हुए यहाँ पहुँचे हैं, उनका अगला क़दम दोनों की पूरी कुंडली है। कुंडली मिलान ज्योतिष की टीम का विवाह कुंडली मिलान दोनों की जन्म-तिथि, समय और स्थान से ये सब साथ देखता है:
- अष्टकूट के पूरे 36 गुण, हर कूट के कारण सहित।
- भकूट और नाड़ी दोष की शास्त्रीय छूट — नक्षत्र-स्वामी वाली वह छूट भी, जो राशि के चार्ट में नहीं दिखती।
- मांगलिक दोष, दोनों की पूरी कुंडली, और विवाह-काल — दोनों की दशा की साझा खिड़की और गुरु का गोचर।
निर्णय अकेले 36 गुण से नहीं होता — 38 गणनाएँ अपने शास्त्रीय भार से तौली जाती हैं। हमारी रिपोर्ट कभी विवाह से मना नहीं करती; कमी हो तो उपाय और किसी जानकार से बात करने की सलाह देती है। भुगतान के बाद मिलान का पूरा परिणाम साइट पर तुरंत खुलता है, पूरी रिपोर्ट PDF में।
शादी हो चुकी है और राशियाँ ऊपर की कठिन जोड़ियों में आती हैं? तब पति-पत्नी कुंडली मिलान देखिए — वह स्वभाव, मंगल, सातवाँ भाव, शुक्र-गुरु, चंद्र (मन), वाणी, अभी की दशा और शनि-गोचर देखकर उपाय और सप्ताह का क्रम बताता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौन सी राशि की जोड़ी सबसे अच्छी मानी जाती है?
राशि के स्तर पर वे 34 जोड़ियाँ सबसे अच्छी हैं जिन्हें भकूट और ग्रह मैत्री के पूरे 12 अंक मिलते हैं। वृषभ, सिंह और तुला की सूची सबसे लंबी (छह-छह राशियाँ) है, कर्क की सबसे छोटी (दो)। पर कोई एक "सबसे अच्छी राशि" नहीं होती — 36 में से 21 गुण नक्षत्र से बनते हैं, और वर्ण-वश्य में वर-वधू की दिशा भी देखी जाती है।
भकूट दोष हो तो क्या शादी हो सकती है?
हाँ। भकूट दोष 36 में से 7 अंकों का सवाल है, और शास्त्र ने इसकी छूट भी बताई है — एक ही राशि-स्वामी, मित्र राशि-स्वामी, या एक ही नक्षत्र-स्वामी। छूट न भी मिले, तो बाक़ी कूट, मांगलिक स्थिति, सप्तम भाव और दशा मिलाकर फ़ैसला होता है। हमारी रिपोर्ट किसी भी जोड़ी को विवाह से मना नहीं करती।
राशि मिलान सूर्य राशि से करें या चंद्र राशि से?
वैदिक विवाह-मिलान सिर्फ़ चंद्र राशि से होता है। "Leo" या "Aries" वाली सूर्य राशि पश्चिमी पद्धति की है, जो जन्म के महीने से तय होती है। चंद्रमा मन का कारक है और सवा दो दिन में राशि बदलता है, इसलिए वह दो लोगों के मन का मेल ज़्यादा बारीकी से बताता है।
नाम से राशि मिलान कितना सही है?
नाम के पहले अक्षर से राशि का अनुमान अवकहड़ा चक्र से लगता है, पर यह तभी सही है जब नाम जन्म-नक्षत्र के अक्षर पर रखा गया हो। वरना नाम की राशि और असली चंद्र राशि अलग निकल सकती है। जन्म-तिथि पता हो तो उसी से मिलान कराइए।
राशि अच्छी मिली पर कुल गुण कम आए, तो क्या करें?
ऐसा अक्सर होता है — राशि से पूरे 12 मिलें, पर नाड़ी या गण में अंक कम आएँ। तब देखिए कि कमी किस कूट में है और उसकी छूट बनती है या नहीं; नाड़ी की भी शास्त्रीय छूट है। कुल गुण के साथ मांगलिक स्थिति, सप्तम भाव और दशा भी देखी जाती है।
एक ही राशि वालों के राशि मिलान में कितने अंक आते हैं?
एक ही राशि हो, तो भकूट (1/1) और ग्रह मैत्री (एक ही स्वामी) के पूरे 12 मिलते हैं, और वर्ण-वश्य भी आम तौर पर पूरे — यानी राशि के 15 में से 15। धनु या मकर में दोनों का चंद्रमा अलग-अलग आधे में हो, तो वश्य घट सकता है। बाक़ी 21 का हिसाब नक्षत्र से चलता है। दोनों के नक्षत्र अलग हों और नाड़ी फिर भी एक हो, तो आंशिक छूट मिलती है। एक ही राशि अच्छी शुरुआत है, आख़िरी जवाब नहीं।