हमारे बारे में
यह मिलान किस पर बना है
यह साइट सिर्फ़ एक काम करती है — कुंडली मिलान। और वह काम शास्त्र के अनुसार, पूरी गहराई से करती है।
शास्त्रीय आधार
अष्टकूट बृहत् पाराशर होरा शास्त्र और मुहूर्त चिन्तामणि पर; वश्य सारावली पर; रज्जु आरोह-अवरोह क्रम पर (पाद से शिर तक चढ़कर वापस — शिर में केवल तीन नक्षत्र), वेध शास्त्रीय वेध-जोड़ों पर; सहम सर्वार्थ चिन्तामणि व ताजक नीलकण्ठी पर। हर खंड अपना स्रोत बताता है।
गणना, अनुमान नहीं
ग्रह-स्थिति खगोलीय गणना से निकलती है, किसी तालिका से नहीं। 36 गुण, दशकूट, नवांश, सप्तांश, द्वादशांश, षड्बल, अष्टकवर्ग — 49 खंड।
जो हम नहीं करते
हम भविष्य की गारंटी नहीं देते, और किसी विवाह को 'मना' नहीं करते। शास्त्र मार्ग दिखाता है; निर्णय आपका और आपके परिवार का है।
जन्म-समय की ईमानदारी
पूरा मिलान चंद्र पर टिका है और चंद्र तेज़ चलता है। इसलिए हर रिपोर्ट यह भी बताती है कि आपके अंक में कितनी भूल सह्य है — यह छिपाया नहीं जाता।
निर्णय बनता कैसे है
मिलान का सबसे आम तरीक़ा यह है कि छत्तीस में से गुण गिन लिए जाएँ और उसी संख्या पर बात ख़त्म हो जाए। हम ऐसा नहीं करते। हमारा निर्णय 39 अलग-अलग मतों को भार-सहित तोलकर बनता है — सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, कलत्र-कारक का बल, विंशोपक, जैमिनी का उपपद और दाराकारक, दशा-काल, मांगलिक, मारण कारक स्थान, बीज-क्षेत्र स्फुट, और बाक़ी। इन सबका कुल भार 29.7 है, और उसमें छत्तीसों गुण मिलकर एक ही मत हैं — पूरे निर्णय का लगभग 3.4%। नाड़ी, भकूट और गण के अपने अलग मत ज़रूर हैं, क्योंकि उनका शून्य गुणों की संख्या से नहीं ढकता। पर वे भी 39 में से एक-एक ही हैं। यह बनावट जान-बूझकर है: अगर गुण-गिनती पूरे निर्णय का बीसवाँ हिस्सा भी नहीं है, तो कम गुण देखकर किसी को विवाह से रोकना गणित से ही ग़लत है।
जहाँ हम आम प्रचलन से अलग चलते हैं
- वश्य में चंद्र का अंश। धनु और मकर आधी-आधी बँटी राशियाँ हैं, इसलिए यहाँ केवल राशि काफ़ी नहीं। जो गणक अंश नहीं देखते, वे इन दो राशियों में क़रीब आधे लोगों को ग़लत वर्ग में डाल देते हैं।
- नाड़ी का आधा-निवारण। एक ही नाड़ी पर तीन शास्त्रीय छूटों में से कोई लगे — राशि एक व नक्षत्र अलग, नक्षत्र एक व राशि अलग, या नक्षत्र एक व पद अलग — तो हम आठ में से चार देते हैं। बहुत से गणक पूरे आठ दे देते हैं, पर शास्त्र इसे क्षीण कहता है, निरस्त नहीं।
- गण में वर-वधू का क्रम। देव वर और मनुष्य वधू को मुहूर्त चिंतामणि पूरे छह देता है, उलटे क्रम को पाँच — बहुत से गणक दोनों को एक-सा पढ़ लेते हैं। देव-राक्षस का एक सबसे तीखा भेद है, और मनुष्य-राक्षस का शून्य वहाँ पूरा हो जाता है जहाँ तीन शास्त्रीय छूटों में से कोई लगे।
- मांगलिक तीन सन्दर्भों से। दोष केवल लग्न से नहीं, चंद्र और शुक्र से भी देखा जाता है — और उसके पूरे निवारण अलग गिने जाते हैं, केवल तीव्रता घटाने वालों से।
जो हम नहीं करते
- हम विवाह से मना नहीं करते। न कम गुण पर, न किसी दोष पर। रिपोर्ट बताती है कि क्या-क्या क्या कह रहा है; फ़ैसला आपका और आपके परिवार का है।
- हम भविष्य की गारंटी नहीं देते। शास्त्र प्रवृत्ति बताता है, नियति नहीं।
- हम उपाय नहीं बेचते। न रत्न, न पूजा, न कुंभ विवाह। दोष है तो लिखा जाएगा, और यह भी लिखा जाएगा कि कौन-सा निवारण अपने आप लग रहा है।
- हम डर नहीं दिखाते। मिलान बेचने के लिए घबराहट पैदा करना इस काम की सबसे पुरानी बीमारी है।
हम अपनी गणना कैसे जाँचते हैं
साइट पर लिखी हर संख्या हर बार असली गणना चलाकर मिलाई जाती है — असली कुंडलियाँ बनाकर, असली PDF निकालकर, और उनके पन्ने गिनकर। कूट-पन्नों की सारणियाँ इंजन की अपनी तालिकाओं से बनती हैं, हाथ से लिखी नहीं गईं, इसलिए पन्ना कभी गणना से अलग बात कह ही नहीं सकता। और जहाँ हमने अपनी गणना में चूक पकड़ी है — और पकड़ी है — वहाँ सुधार के साथ एक जाँच भी लिखी गई है, ताकि वही चूक दोबारा न लौटे। जन्म-स्थान अब 83 देशों और राज्यों के 913 शहरों तक जाता है, हर एक अपने समय-क्षेत्र के साथ, ताकि विदेश में हुआ जन्म भी सही बैठे।
किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले योग्य ज्योतिषी से भी परामर्श कीजिए। यह रिपोर्ट उसका विकल्प नहीं, सहायक है।
दोनों का जन्म-विवरण भरिए
तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।