दीपावली एक दिन का नहीं, पाँच दिनों का उत्सव है — धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। हर दिन की तारीख़ उसकी अपनी तिथि और अपने समय-नियम से तय होती है, इसलिए कभी दो पर्व एक ही दिन पड़ जाते हैं और कभी बीच में एक दिन ख़ाली छूट जाता है। नीचे की सारणी आपके चुने शहर के लिए हर पर्व की तारीख़ और उसका मुख्य समय गिनती है।
दीपावली 2029 — सभी दिन, दिल्ली के समय से
सोमवार, 5 नवंबर 2029आज से 1096 दिन बाद · शहर: दिल्ली
| पर्व | तारीख़ | मुख्य समय |
|---|---|---|
| गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) | शनिवार, 3 नवंबर 2029 | प्रदोष काल 17:35 से 20:10 तक |
| धनतेरस (धनत्रयोदशी) | रविवार, 4 नवंबर 2029 | पूजा मुहूर्त 17:34 से 20:10 तक |
| काली चौदस | रविवार, 4 नवंबर 2029 | निशीथ काल 23:39 से 00:31 (अगले दिन) तक |
| नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | सोमवार, 5 नवंबर 2029 | अभ्यंग स्नान 05:30 से 06:36 तक |
| दीपावली — लक्ष्मी पूजा | सोमवार, 5 नवंबर 2029 | लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 18:06 से 20:01 तक |
| गोवर्धन पूजा · अन्नकूट · बलि प्रतिपदा | मंगलवार, 6 नवंबर 2029 | सायंकाल मुहूर्त 15:22 से 17:32 तक |
| गुजराती नव वर्ष | मंगलवार, 6 नवंबर 2029 | सूर्योदय पर प्रतिपदा — |
| भाई दूज (यम द्वितीया) | बुधवार, 7 नवंबर 2029 | अपराह्न (तिलक का समय) 13:11 से 15:20 तक |
गणना: चुने शहर का सूर्योदय-सूर्यास्त और तिथि के असली क्षण (स्विस एफ़िमेरिस, लाहिरी अयनांश)। तारीख़ें धर्मसिन्धु-निर्णयसिन्धु के नियमों से, और Drik Panchang के कई शहरों के कैलेंडर से मिलाई गई हैं। सूर्योदय = सूरज का ऊपरी किनारा क्षितिज पर, मानक अपवर्तन सहित। समय शहर के स्थानीय समय में। हर मुहूर्त की शुरुआत अगले पूरे मिनट से और अंत पिछले पूरे मिनट तक लिखी है, ताकि दिखाया हर मिनट मुहूर्त के भीतर रहे; इसलिए दूसरे पंचांगों से एक मिनट का अंतर दिख सकता है।
सारणी के ऊपर शहर का नाम लिखिए, या फ़ोन पर "मेरे पास का शहर" दबाइए। "अगला वर्ष" से आने वाले वर्षों का पूरा दीपोत्सव देख सकते हैं। 'deepawali kab hai' पूछने वाले अक्सर जानना चाहते हैं कि धनतेरस, छोटी दिवाली और भाई दूज किस दिन हैं — ये सब इसी एक सारणी में हैं।
पाँच दिन, पर तारीख़ें छह-सात तक क्यों
हिन्दू पर्व तिथि से चलते हैं, और तिथि की लंबाई 19 से 26 घंटे तक बदलती रहती है। कोई तिथि दो सूर्योदयों तक फैल जाती है, तो कोई किसी सूर्योदय को छुए बिना ही निकल जाती है। ऊपर से हर पर्व का "समय-नियम" अलग है — किसी में प्रदोष देखा जाता है, किसी में सूर्योदय से पहले का समय, किसी में दोपहर के बाद का। इसका नतीजा:
- कभी नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा एक ही दिन — सुबह चतुर्दशी रहे और शाम तक अमावस्या लग जाए, तो सुबह का अभ्यंग स्नान और शाम की लक्ष्मी पूजा एक ही तारीख़ पर।
- कभी लक्ष्मी पूजा और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन — अमावस्या लंबी हो और अगली सुबह तक चले, तो बीच का दिन "दिवाली स्नान" का दिन रह जाता है।
- कभी गोवर्धन पूजा और भाई दूज एक दिन, या धनतेरस और काली चौदस एक दिन।
इसलिए "दिवाली के अगले दिन गोवर्धन, उसके अगले दिन भाई दूज" वाली याद हर साल सही नहीं निकलती। ऊपर की सारणी हर पर्व को अलग-अलग गिनती है।
धनतेरस — प्रदोष में त्रयोदशी
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस (धनत्रयोदशी) मनाई जाती है। नियम: जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी हो। दोनों दिन हो, तो दिवाली वाला ही एक-घटी नियम; किसी प्रदोष को न छुए, तो जिस दिन सूर्योदय पर त्रयोदशी हो।
- धन्वंतरि जयंती। परंपरा में इसी तिथि को समुद्र-मंथन से आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए। इसलिए यह दिन आरोग्य का भी है — धन का अर्थ यहाँ केवल पैसा नहीं, स्वास्थ्य भी है।
- यम दीपदान। प्रदोष में घर के बाहर दक्षिण की ओर मुख करके एक दीया जलाने की परंपरा है — परिवार की लंबी आयु और भय-मुक्ति की भावना से।
- ख़रीदारी। बर्तन, चाँदी या कोई नई धातु ख़रीदने की रीति लोक में बहुत प्रचलित है। कुंडली मिलान ज्योतिष की टीम इसे परंपरा की तरह बताती है — कोई ख़रीदारी अपने-आप धन नहीं बढ़ाती, और सामर्थ्य से बाहर कुछ लेना ज़रूरी नहीं।
सारणी में धनतेरस का "पूजा मुहूर्त" प्रदोष और स्थिर वृषभ लग्न के मेल का समय है, ठीक वैसे ही जैसे दिवाली पर। 'dhanteras kab hai' का जवाब भी इसी पंक्ति में है।
नरक चतुर्दशी — छोटी दिवाली, रूप चौदस
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दो रूप हैं, और उनके नियम अलग हैं।
नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान) — सूर्योदय से पहले, जब चतुर्दशी चल रही हो, तेल-उबटन लगाकर स्नान। भागवत की कथा में श्रीकृष्ण और सत्यभामा ने नरकासुर का अंत करके सोलह हज़ार से अधिक बंदी स्त्रियों को मुक्त किया था, और परंपरा इस विजय को इसी तिथि से जोड़ती है। सारणी में "अभ्यंग स्नान" का समय चंद्रोदय से सूर्योदय तक का है, जब चतुर्दशी हो। राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे रूप चौदस भी कहते हैं — सुबह का उबटन-स्नान रूप और आरोग्य से जुड़ा है।
छोटी दिवाली — उसी दिन शाम को घर में कुछ दीये जलाने की रीति, अगले बड़े दिन की तैयारी के रूप में। 'chhoti diwali kab hai' खोजने वालों के लिए यही दिन है। जिस साल नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा एक ही दिन हों, उस साल अलग से "छोटी दिवाली" का दिन नहीं बचता।
काली चौदस — निशीथ में चतुर्दशी
गुजरात और पश्चिम भारत में चतुर्दशी की रात काली चौदस कहलाती है। नियम: जिस रात निशीथ (आधी रात का मुहूर्त) में चतुर्दशी हो। इस रात महाकाली और हनुमान जी की पूजा की परंपरा है — कई घरों में हनुमान चालीसा का पाठ होता है। इसलिए कई बार काली चौदस नरक चतुर्दशी से एक दिन पहले पड़ती है: रात को चतुर्दशी लग जाए, तो वह रात काली चौदस, और अगली सुबह अभ्यंग स्नान।
इस रात के नाम पर फैले टोटकों की सलाह हम नहीं देते। पूजा, पाठ और दीप — बस इतना।
लक्ष्मी पूजा — प्रदोष में अमावस्या
दीपोत्सव का सबसे बड़ा दिन। नियम: जिस दिन प्रदोष में अमावस्या हो; दोनों दिन हो, तो दूसरा दिन तभी जब उस शाम कम से कम एक घटी अमावस्या रहे। लक्ष्मी पूजा का पूरा मुहूर्त — प्रदोष, वृषभ लग्न, महानिशीथ, सिंह लग्न — और घर पर सरल पूजा-विधि हमारे "दिवाली कब है — लक्ष्मी पूजा मुहूर्त" पन्ने पर विस्तार से दी है। गुजरात में इसी शाम व्यापारी नई बही की पूजा — चोपड़ा पूजन — करते हैं, और बंगाल में इसी रात महानिशीथ में काली पूजा होती है।
गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और बलि प्रतिपदा
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा होती है। भागवत में कथा है कि श्रीकृष्ण ने इंद्र-पूजा की जगह गोवर्धन पर्वत, गायों और प्रकृति की पूजा करवाई, और इंद्र के कोप से हुई वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन को उँगली पर उठा लिया। इसी स्मृति में गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा, और छप्पन भोग का अन्नकूट।
इसकी तारीख़ का नियम सबसे बारीक है, और हमने इसे Drik Panchang के दस शहरों के कैलेंडर से मिलाकर पक्का किया है:
- प्रतिपदा जिस दिन शुरू होती है, अगर उस दिन के आठवें मुहूर्त से पहले (दिन का लगभग आधा हिस्सा बीतने से पहले) शुरू हो जाए, तो गोवर्धन पूजा उसी दिन सायंकाल में।
- वरना अगले दिन प्रातःकाल में।
इसीलिए किसी-किसी साल पश्चिम के शहरों — अहमदाबाद, मुंबई, जयपुर — में गोवर्धन पूजा लक्ष्मी पूजा के अगले दिन शाम को होती है, जबकि दिल्ली या कोलकाता में उसके भी अगले दिन सुबह। सारणी में "सायंकाल मुहूर्त" या "प्रातःकाल मुहूर्त" इसी से लिखा आता है। 'govardhan puja kab hai' का जवाब शहर देखकर ही देना ठीक है।
बलि प्रतिपदा (दिवाली पाडवा) — महाराष्ट्र में यही दिन राजा बलि की स्मृति और पति-पत्नी के प्रेम का दिन है; पत्नी पति की आरती उतारती है। गुजराती नव वर्ष (बेसतुं वरस) — गुजरात में विक्रम संवत का नया साल उस दिन से गिना जाता है जिस दिन सूर्योदय पर प्रतिपदा हो; इसलिए कभी-कभी वह गोवर्धन पूजा से एक दिन बाद पड़ता है। सारणी में यह अलग पंक्ति में है।
भाई दूज — अपराह्न में द्वितीया
कार्तिक शुक्ल द्वितीया यम द्वितीया कहलाती है। परंपरा में यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना के घर गए थे; यमुना ने उनका तिलक करके भोजन कराया, और यम ने वर दिया कि इस दिन जो भाई बहन के घर जाकर तिलक कराए, उसे भय न हो। इसी से भाई दूज — महाराष्ट्र में भाऊबीज, गुजरात में भाईबीज, बंगाल में भाई फोंटा।
नियम: जिस दिन अपराह्न (दिन के पाँच भागों में से चौथा, दोपहर बाद का) में द्वितीया हो; दो दिन छुए, तो जिस दिन ज़्यादा। सारणी में "अपराह्न (तिलक का समय)" यही है। 'bhai dooj kab hai' पूछने वालों को यह समय भी देखना चाहिए, क्योंकि तिलक की परंपरा अपराह्न की है। इसी दिन कायस्थ परिवार चित्रगुप्त पूजा — क़लम-दवात की पूजा — करते हैं।
वसु बारस और वाघ बारस — पहला दिन
महाराष्ट्र में दीपोत्सव धनतेरस से एक दिन पहले, वसु बारस से शुरू होता है — गोवत्स द्वादशी, यानी गाय और बछड़े की पूजा। गुजरात में इसे वाघ बारस कहते हैं। नियम: प्रदोष में द्वादशी। कई बार यह धनतेरस वाले दिन ही पड़ जाती है, जब द्वादशी और त्रयोदशी दोनों उसी दिन हों।
कौन-सा दिन किस क्षेत्र में कैसे
| पर्व | उत्तर भारत | महाराष्ट्र | गुजरात |
|---|---|---|---|
| गोवत्स द्वादशी | — | वसु बारस | वाघ बारस |
| धनत्रयोदशी | धनतेरस | धनत्रयोदशी | धनतेरस |
| कृष्ण चतुर्दशी | नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली | नरक चतुर्दशी (अभ्यंगस्नान) | काली चौदस (रात), रूप चौदस |
| अमावस्या | दीपावली, लक्ष्मी पूजा | लक्ष्मीपूजन | दिवाली, चोपड़ा पूजन |
| शुक्ल प्रतिपदा | गोवर्धन पूजा, अन्नकूट | बलि प्रतिपदा (पाडवा) | बेसतुं वरस (नव वर्ष) |
| शुक्ल द्वितीया | भाई दूज | भाऊबीज | भाईबीज |
पाँचों दिन की सरल तैयारी
हर दिन का एक छोटा, हानि-रहित काम — जितना सहज लगे, उतना कीजिए।
| दिन | सरल काम |
|---|---|
| वसु बारस | गाय को हरा चारा या रोटी; घर में दूध-दही का सम्मान |
| धनतेरस | शाम को दरवाज़े पर दक्षिणमुखी यम-दीप; धन्वंतरि का स्मरण, किसी रोगी या बुज़ुर्ग की सेवा |
| नरक चतुर्दशी | सूर्योदय से पहले तेल-उबटन से स्नान; शाम को कुछ दीये |
| काली चौदस | रात को हनुमान चालीसा या 'ॐ हं हनुमते नमः' का जप |
| लक्ष्मी पूजा | प्रदोष में गणेश-लक्ष्मी पूजा, बही-खाते की पूजा, घर भर में दीपदान |
| गोवर्धन पूजा | अन्नकूट — घर में बने व्यंजनों का भोग, फिर सबके साथ बाँटकर भोजन |
| भाई दूज | अपराह्न में बहन के घर तिलक और भोजन; न जा सकें तो फ़ोन पर ही आशीर्वाद |
दान इन दिनों का सबसे सरल उपाय है — अन्न, दीये, कपड़े, या किसी ज़रूरतमंद परिवार के त्योहार में थोड़ी मदद। इसमें न कोई ख़र्च की होड़ है, न कोई डर।
पाँचों दिन का ज्योतिषीय धागा
इन पाँच दिनों में सूर्य तुला राशि में रहता है और चंद्र घटता-घटता अमावस्या को अदृश्य हो जाता है, फिर प्रतिपदा से नया बढ़ना शुरू करता है। यानी यह उत्सव एक अंत और एक शुरुआत के बीच का पुल है — कृष्ण पक्ष का अंतिम सिरा (धनतेरस, चतुर्दशी, अमावस्या) और शुक्ल पक्ष का पहला सिरा (प्रतिपदा, द्वितीया)। इसीलिए पहले तीन दिन सफ़ाई, आरोग्य, दीपदान और अँधेरे पर जीत की बात करते हैं, और बाद के दो दिन नए साल, अन्न और रिश्तों की।
भाई दूज और पाडवा, दोनों रिश्तों के पर्व हैं — एक भाई-बहन का, दूसरा पति-पत्नी का। उत्सव का अंत परिवार पर होता है।
परिवार का मेल — कुंडली से
दीपोत्सव का हर दिन परिवार के साथ बीतता है — सास-बहू साथ रसोई सँभालती हैं, भाई-बहन तिलक करते हैं, पूरा घर एक साथ पूजा में बैठता है। जिस घर में आपसी तालमेल अच्छा हो, वहाँ त्योहार हल्का लगता है; जहाँ खटपट हो, वहाँ वही दिन भारी हो जाते हैं।
कुंडली मिलान ज्योतिष की टीम ने घर के रिश्तों के लिए दो मिलान बनाए हैं। गृह-शांति कुंडली मिलान घर के किन्हीं दो सदस्यों की कुंडली साथ पढ़कर स्वभाव का मेल, चौथा भाव, वाणी, चल रही दशा और शनि का गोचर देखता है। सास-बहू कुंडली मिलान चार कूटों (गण, ग्रह-मैत्री, भकूट, तारा — 21 अंक) से दोनों का स्वभाव-मेल और घर का भाव बताता है। दोनों रिपोर्टें किसी को दोषी नहीं ठहरातीं — जहाँ ध्यान चाहिए, वहाँ दोनों के लिए सरल उपाय बताती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दीपावली कब है 2026 में?
इस वर्ष के दीपोत्सव के सभी दिन — धनतेरस से भाई दूज तक — इस पन्ने के सबसे ऊपर की सारणी में आपके शहर के लिए दिए हैं। बड़ी तारीख़ लक्ष्मी पूजा की है; उसके नीचे हर पर्व अपनी तारीख़ और मुख्य समय के साथ।
धनतेरस कब है?
धनतेरस उस दिन है जिस दिन प्रदोष काल में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी हो। सारणी की "धनतेरस" पंक्ति में तारीख़ और पूजा मुहूर्त — प्रदोष और वृषभ लग्न का मेल — दिया है। यम दीपदान भी इसी प्रदोष में होता है।
छोटी दिवाली कब है?
छोटी दिवाली नरक चतुर्दशी का ही दूसरा नाम है — जिस दिन सूर्योदय से पहले चतुर्दशी हो। सारणी में उसकी तारीख़ और अभ्यंग स्नान का समय है। जिस साल यह लक्ष्मी पूजा वाले दिन ही पड़े, उस साल अलग छोटी दिवाली नहीं होती।
गोवर्धन पूजा कब है?
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को। अगर प्रतिपदा लक्ष्मी पूजा के अगले दिन दोपहर से पहले शुरू हो जाए, तो उसी शाम; वरना उसके अगले दिन सुबह। इसीलिए शहर-शहर में तारीख़ बदल सकती है — सारणी में अपने शहर की देखिए।
भाई दूज कब है?
जिस दिन अपराह्न — दोपहर बाद का भाग — में कार्तिक शुक्ल द्वितीया हो। सारणी में भाई दूज की तारीख़ के साथ अपराह्न का समय भी है, क्योंकि तिलक इसी समय करने की परंपरा है।
क्या नरक चतुर्दशी और दिवाली एक ही दिन हो सकती है?
हाँ, अक्सर होता है। सुबह सूर्योदय से पहले चतुर्दशी हो और दोपहर से अमावस्या लग जाए, तो सुबह अभ्यंग स्नान और शाम को लक्ष्मी पूजा — दोनों उसी तारीख़ पर। सारणी में दोनों अलग पंक्तियों में दिखती हैं।
गुजराती नव वर्ष और गोवर्धन पूजा अलग दिन क्यों हो जाते हैं?
गुजराती नव वर्ष उस दिन गिना जाता है जिस दिन सूर्योदय पर प्रतिपदा हो, जबकि गोवर्धन पूजा का नियम प्रतिपदा के शुरू होने के समय से चलता है। जब प्रतिपदा दोपहर से पहले शुरू हो जाए, तो गोवर्धन पूजा उसी शाम और नव वर्ष अगली सुबह।