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अष्टकूट · 8 गुण

नाड़ी

स्वास्थ्य और संतान-सुख

8गुण
36आठ कूट, छत्तीस गुण

नक्षत्र तीन नाड़ियों में बँटे हैं — आदि, मध्य, अन्त्य। दोनों की नाड़ी अलग हो तो पूरे आठ गुण; एक हो तो शून्य। यह अष्टकूट का सबसे भारी कूट है और गुणों की संख्या से नहीं कटता।

शून्य आने पर क्या

नाड़ी में शून्य दोनों की एक ही नाड़ी होने से आता है और यह अष्टकूट का सबसे भारी दोष है। एक ही चंद्र-राशि व भिन्न नक्षत्र होने पर शास्त्र इसे आंशिक रूप से क्षीण मानता है, पूरी तरह नहीं। पूर्ण निवारण के लिए योग्य ज्योतिषी अपेक्षित।

कैसे गिना जाता है

  1. दोनों के नक्षत्र से नाड़ी निकालिए — आदि, मध्य या अन्त्य। हर नाड़ी में नौ नक्षत्र।
  2. नाड़ी अलग-अलग हो तो पूरे 8; एक ही हो तो 0 — यही नाड़ी दोष है।
  3. एक ही नाड़ी होने पर भी तीन शास्त्रीय छूटें हैं — चंद्र-राशि एक और नक्षत्र अलग, नक्षत्र एक और राशि अलग, या नक्षत्र एक और पद अलग। कोई लगे तो दोष घटता है — 8 में से 4। शास्त्र इसे क्षीण कहता है, मिटा हुआ नहीं।

यहाँ हम आम प्रचलन से अलग चलते हैं

एक ही नाड़ी पर तीन शास्त्रीय छूटों में से कोई लगे — राशि एक व नक्षत्र अलग, नक्षत्र एक व राशि अलग, या नक्षत्र एक व पद अलग — तो हम आधे अंक देते हैं, पूरे नहीं। बहुत से गणक यहाँ पूरे 8 दे देते हैं, पर शास्त्र इस स्थिति को “क्षीण” कहता है, “निरस्त” नहीं। इसीलिए हम 4 देते हैं और दोष को रिपोर्ट में दिखाते भी हैं।

निर्णय में इसका भार

छत्तीस गुणों के अलावा इस कूट का अपना एक अलग मत भी है, भार 1.3। शून्य यहाँ गुणों की संख्या से नहीं ढकता — इसीलिए इसे अलग से तोला जाता है।

मतभार
छत्तीस गुण — सब मिलाकर1.0
नाड़ी — अपना अलग मत1.3
भकूट — अपना अलग मत1.1
गण — अपना अलग मत0.9
दशकूट — रज्जु व वेध0.6
विस्तारित कूट0.6
बाक़ी 33 मत24.2
कुल — 3929.7

हमारा निर्णय 39 मतों को भार-सहित तोलकर बनता है, जिनका कुल भार 29.7 है। छत्तीसों गुण मिलकर उनमें से एक मत हैं — यानी पूरे निर्णय का लगभग 3.4%। बाक़ी सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, विंशोपक, जैमिनी, दशा-काल और मांगलिक जैसे मत तय करते हैं। यही वजह है कि यह रिपोर्ट कम गुण देखकर विवाह से कभी मना नहीं करती।

शास्त्रीय सारणी

नक्षत्रनाड़ीनक्षत्रनाड़ीनक्षत्रनाड़ी
1. अश्विनीआदि2. भरणीमध्य3. कृत्तिकाअन्त्य
4. रोहिणीअन्त्य5. मृगशिरामध्य6. आर्द्राआदि
7. पुनर्वसुआदि8. पुष्यमध्य9. आश्लेषाअन्त्य
10. मघाअन्त्य11. पूर्वाफाल्गुनीमध्य12. उत्तराफाल्गुनीआदि
13. हस्तआदि14. चित्रामध्य15. स्वातिअन्त्य
16. विशाखाअन्त्य17. अनुराधामध्य18. ज्येष्ठाआदि
19. मूलआदि20. पूर्वाषाढ़ामध्य21. उत्तराषाढ़ाअन्त्य
22. श्रवणअन्त्य23. धनिष्ठामध्य24. शतभिषाआदि
25. पूर्वाभाद्रपदआदि26. उत्तराभाद्रपदमध्य27. रेवतीअन्त्य

बाक़ी सात कूट

हर कूट विस्तार से पढ़िए

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तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।

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