अष्टकूट · 8 गुण
नाड़ी
स्वास्थ्य और संतान-सुख
नक्षत्र तीन नाड़ियों में बँटे हैं — आदि, मध्य, अन्त्य। दोनों की नाड़ी अलग हो तो पूरे आठ गुण; एक हो तो शून्य। यह अष्टकूट का सबसे भारी कूट है और गुणों की संख्या से नहीं कटता।
शून्य आने पर क्या
नाड़ी में शून्य दोनों की एक ही नाड़ी होने से आता है और यह अष्टकूट का सबसे भारी दोष है। एक ही चंद्र-राशि व भिन्न नक्षत्र होने पर शास्त्र इसे आंशिक रूप से क्षीण मानता है, पूरी तरह नहीं। पूर्ण निवारण के लिए योग्य ज्योतिषी अपेक्षित।
कैसे गिना जाता है
- दोनों के नक्षत्र से नाड़ी निकालिए — आदि, मध्य या अन्त्य। हर नाड़ी में नौ नक्षत्र।
- नाड़ी अलग-अलग हो तो पूरे 8; एक ही हो तो 0 — यही नाड़ी दोष है।
- एक ही नाड़ी होने पर भी तीन शास्त्रीय छूटें हैं — चंद्र-राशि एक और नक्षत्र अलग, नक्षत्र एक और राशि अलग, या नक्षत्र एक और पद अलग। कोई लगे तो दोष घटता है — 8 में से 4। शास्त्र इसे क्षीण कहता है, मिटा हुआ नहीं।
यहाँ हम आम प्रचलन से अलग चलते हैं
एक ही नाड़ी पर तीन शास्त्रीय छूटों में से कोई लगे — राशि एक व नक्षत्र अलग, नक्षत्र एक व राशि अलग, या नक्षत्र एक व पद अलग — तो हम आधे अंक देते हैं, पूरे नहीं। बहुत से गणक यहाँ पूरे 8 दे देते हैं, पर शास्त्र इस स्थिति को “क्षीण” कहता है, “निरस्त” नहीं। इसीलिए हम 4 देते हैं और दोष को रिपोर्ट में दिखाते भी हैं।
निर्णय में इसका भार
छत्तीस गुणों के अलावा इस कूट का अपना एक अलग मत भी है, भार 1.3। शून्य यहाँ गुणों की संख्या से नहीं ढकता — इसीलिए इसे अलग से तोला जाता है।
| मत | भार |
|---|---|
| छत्तीस गुण — सब मिलाकर | 1.0 |
| नाड़ी — अपना अलग मत | 1.3 |
| भकूट — अपना अलग मत | 1.1 |
| गण — अपना अलग मत | 0.9 |
| दशकूट — रज्जु व वेध | 0.6 |
| विस्तारित कूट | 0.6 |
| बाक़ी 33 मत | 24.2 |
| कुल — 39 | 29.7 |
हमारा निर्णय 39 मतों को भार-सहित तोलकर बनता है, जिनका कुल भार 29.7 है। छत्तीसों गुण मिलकर उनमें से एक मत हैं — यानी पूरे निर्णय का लगभग 3.4%। बाक़ी सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, विंशोपक, जैमिनी, दशा-काल और मांगलिक जैसे मत तय करते हैं। यही वजह है कि यह रिपोर्ट कम गुण देखकर विवाह से कभी मना नहीं करती।
शास्त्रीय सारणी
| नक्षत्र | नाड़ी | नक्षत्र | नाड़ी | नक्षत्र | नाड़ी |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. अश्विनी | आदि | 2. भरणी | मध्य | 3. कृत्तिका | अन्त्य |
| 4. रोहिणी | अन्त्य | 5. मृगशिरा | मध्य | 6. आर्द्रा | आदि |
| 7. पुनर्वसु | आदि | 8. पुष्य | मध्य | 9. आश्लेषा | अन्त्य |
| 10. मघा | अन्त्य | 11. पूर्वाफाल्गुनी | मध्य | 12. उत्तराफाल्गुनी | आदि |
| 13. हस्त | आदि | 14. चित्रा | मध्य | 15. स्वाति | अन्त्य |
| 16. विशाखा | अन्त्य | 17. अनुराधा | मध्य | 18. ज्येष्ठा | आदि |
| 19. मूल | आदि | 20. पूर्वाषाढ़ा | मध्य | 21. उत्तराषाढ़ा | अन्त्य |
| 22. श्रवण | अन्त्य | 23. धनिष्ठा | मध्य | 24. शतभिषा | आदि |
| 25. पूर्वाभाद्रपद | आदि | 26. उत्तराभाद्रपद | मध्य | 27. रेवती | अन्त्य |
बाक़ी सात कूट
दोनों का जन्म-विवरण भरिए
तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।