अष्टकूट · 7 गुण
भकूट
प्रेम, संतान और समृद्धि
दोनों की चंद्र-राशियों के बीच की दूरी। 6-8, 2-12 और 5-9 का अंतर दोष माना गया है। पर एक ही राशि हो, नक्षत्र-स्वामी एक हो, या राशि-स्वामी एक ही हों या परस्पर मित्र हों — तो दोष निरस्त हो जाता है।
शून्य आने पर क्या
भकूट में शून्य 6-8, 2-12 या 5-9 के राशि-अंतर से आता है। इसके भी वही तीन अपवाद हैं। बिना निवारण के यह गुणों की संख्या से नहीं कटता — 28 गुण मिलने पर भी इसे निर्बाध स्वीकृति नहीं माना जाता।
कैसे गिना जाता है
- दोनों की चंद्र-राशियों के बीच की दूरी दोनों तरफ़ से गिनिए।
- जोड़ी 2–12, 6–8 या 5–9 बने तो दोष और अंक 0; कोई और दूरी हो तो पूरे 7।
- दोष पर वही तीन निवारण देखे जाते हैं — एक ही राशि, एक ही नक्षत्र-स्वामी, या राशि-स्वामी एक ही या मित्र। लगे तो पूरे 7 लौट आते हैं।
यहाँ हम आम प्रचलन से अलग चलते हैं
सात गुणों का यह कूट नाड़ी से हल्का है, पर शून्य आने पर गुणों की कुल संख्या इसे नहीं ढकती। 28 गुण मिलने पर भी अनिरस्त भकूट को हम निर्बाध स्वीकृति नहीं लिखते — इसका अपना अलग मत है।
निर्णय में इसका भार
छत्तीस गुणों के अलावा इस कूट का अपना एक अलग मत भी है, भार 1.1। शून्य यहाँ गुणों की संख्या से नहीं ढकता — इसीलिए इसे अलग से तोला जाता है।
| मत | भार |
|---|---|
| छत्तीस गुण — सब मिलाकर | 1.0 |
| नाड़ी — अपना अलग मत | 1.3 |
| भकूट — अपना अलग मत | 1.1 |
| गण — अपना अलग मत | 0.9 |
| दशकूट — रज्जु व वेध | 0.6 |
| विस्तारित कूट | 0.6 |
| बाक़ी 33 मत | 24.2 |
| कुल — 39 | 29.7 |
हमारा निर्णय 39 मतों को भार-सहित तोलकर बनता है, जिनका कुल भार 29.7 है। छत्तीसों गुण मिलकर उनमें से एक मत हैं — यानी पूरे निर्णय का लगभग 3.4%। बाक़ी सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, विंशोपक, जैमिनी, दशा-काल और मांगलिक जैसे मत तय करते हैं। यही वजह है कि यह रिपोर्ट कम गुण देखकर विवाह से कभी मना नहीं करती।
शास्त्रीय सारणी
| राशि-दूरी | क्या माना जाता है | गुण |
|---|---|---|
| 1 – 1 (एक ही राशि) | अनुकूल | 7 |
| 2 – 12 | द्विर्द्वादश — दोष | 0 |
| 3 – 11 | अनुकूल | 7 |
| 4 – 10 | अनुकूल | 7 |
| 5 – 9 | नवपंचम — दोष | 0 |
| 6 – 8 | षडाष्टक — दोष | 0 |
बाक़ी सात कूट
दोनों का जन्म-विवरण भरिए
तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।