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अष्टकूट · 5 गुण

ग्रह मैत्री

मन की मित्रता

5गुण
36आठ कूट, छत्तीस गुण

दोनों की चंद्र-राशि के स्वामी एक-दूसरे को मित्र, सम या शत्रु मानते हैं — और यह दोनों ओर से देखा जाता है, क्योंकि यह रिश्ता हमेशा बराबर नहीं होता: चंद्र बुध को मित्र मानता है, पर बुध चंद्र को शत्रु — ऐसी जोड़ी को 1 गुण।

शून्य आने पर क्या

ग्रह मैत्री में शून्य का अर्थ है दोनों की चंद्र-राशि के स्वामी परस्पर शत्रु। मन की मित्रता स्वतः नहीं बनती, प्रयास से बनती है। यह वर्जन नहीं है।

कैसे गिना जाता है

  1. दोनों की चंद्र-राशि के स्वामी ग्रह लीजिए।
  2. बृहत्पाराशर की नैसर्गिक मैत्री से दोनों ओर का संबंध देखिए — वर का स्वामी वधू के स्वामी को क्या मानता है, और वधू का स्वामी वर के स्वामी को।
  3. दोनों मित्र (या एक ही स्वामी) 5, एक मित्र-एक सम 4, दोनों सम 3, एक मित्र-एक शत्रु 1, एक सम-एक शत्रु ½, दोनों शत्रु 0।

निर्णय में इसका भार

इस कूट का अपना अलग मत नहीं है। यह “छत्तीस गुण” वाले एक ही मत में गिना जाता है — यानी वर्ण, वश्य, तारा, योनि और ग्रह-मैत्री, पाँचों मिलकर उसी एक मत में आते हैं।

मतभार
छत्तीस गुण — सब मिलाकर1.0
नाड़ी — अपना अलग मत1.3
भकूट — अपना अलग मत1.1
गण — अपना अलग मत0.9
दशकूट — रज्जु व वेध0.6
विस्तारित कूट0.6
बाक़ी 33 मत24.2
कुल — 3929.7

हमारा निर्णय 39 मतों को भार-सहित तोलकर बनता है, जिनका कुल भार 29.7 है। छत्तीसों गुण मिलकर उनमें से एक मत हैं — यानी पूरे निर्णय का लगभग 3.4%। बाक़ी सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, विंशोपक, जैमिनी, दशा-काल और मांगलिक जैसे मत तय करते हैं। यही वजह है कि यह रिपोर्ट कम गुण देखकर विवाह से कभी मना नहीं करती।

शास्त्रीय सारणी

चंद्र-राशि के स्वामियों का संबंधगुण
एक ही स्वामी / परम मित्र5
मित्र4
सम3
शत्रु1
परम शत्रु0

बाक़ी सात कूट

हर कूट विस्तार से पढ़िए

दोनों का जन्म-विवरण भरिए

तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।

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