अष्टकूट · 3 गुण
तारा
एक-दूसरे का भाग्य और स्वास्थ्य
वर के नक्षत्र से वधू का, और वधू से वर का — दोनों दिशाओं में गिनती होती है, नौ से भाग देकर। विपत्, प्रत्यक् और वध अशुभ हैं; जन्म, सम्पत्, क्षेम, साधक, मित्र और अतिमित्र शुभ। हर दिशा के डेढ़ गुण।
शून्य आने पर क्या
तारा दोनों दिशाओं में गिना जाता है और हर दिशा के डेढ़ गुण हैं। दोनों दिशाएँ एक साथ अशुभ कभी नहीं होतीं (दोनों गिनतियों का जोड़ 29 रहता है), इसलिए अंक 1.5 या 3 ही बनता है। 1.5 का अर्थ है एक ओर अशुभ तारा — तब स्वास्थ्य और भाग्य के पक्ष पर थोड़ा ध्यान देना चाहिए।
कैसे गिना जाता है
- वर के नक्षत्र से वधू के नक्षत्र तक गिनिए, दोनों सिरे जोड़कर।
- उस गिनती में 9 का भाग दीजिए। शेष 3, 5 या 7 हो (विपत्, प्रत्यक्, वध) तो तारा अशुभ; बाक़ी हर शेष पर तारा शुभ — 1.5 गुण। एक ही नक्षत्र (जन्म-तारा) भी शुभ गिना जाता है।
- अब उल्टी दिशा में, वधू से वर तक, वही गिनती और वही भाग — शुभ हो तो और 1.5। दोनों दिशाएँ एक साथ अशुभ कभी नहीं होतीं, इसलिए कुल 1.5 या 3 ही आता है।
यहाँ हम आम प्रचलन से अलग चलते हैं
दोनों दिशाएँ अलग-अलग गिनी जाती हैं, इसलिए 3 में से 1.5 आना बहुत आम है। यह आधा मेल है — न पूरा शुभ, न दोष। हमारी रिपोर्ट इसे “शुभ” नहीं लिखती, आधा ही कहती है।
निर्णय में इसका भार
इस कूट का अपना अलग मत नहीं है। यह “छत्तीस गुण” वाले एक ही मत में गिना जाता है — यानी वर्ण, वश्य, तारा, योनि और ग्रह-मैत्री, पाँचों मिलकर उसी एक मत में आते हैं।
| मत | भार |
|---|---|
| छत्तीस गुण — सब मिलाकर | 1.0 |
| नाड़ी — अपना अलग मत | 1.3 |
| भकूट — अपना अलग मत | 1.1 |
| गण — अपना अलग मत | 0.9 |
| दशकूट — रज्जु व वेध | 0.6 |
| विस्तारित कूट | 0.6 |
| बाक़ी 33 मत | 24.2 |
| कुल — 39 | 29.7 |
हमारा निर्णय 39 मतों को भार-सहित तोलकर बनता है, जिनका कुल भार 29.7 है। छत्तीसों गुण मिलकर उनमें से एक मत हैं — यानी पूरे निर्णय का लगभग 3.4%। बाक़ी सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, विंशोपक, जैमिनी, दशा-काल और मांगलिक जैसे मत तय करते हैं। यही वजह है कि यह रिपोर्ट कम गुण देखकर विवाह से कभी मना नहीं करती।
शास्त्रीय सारणी
| गिनती | तारा | फल |
|---|---|---|
| 1 | जन्म | शुभ — अपना ही नक्षत्र भी |
| 2 | सम्पत् | शुभ |
| 3 | विपत् | अशुभ |
| 4 | क्षेम | शुभ |
| 5 | प्रत्यक् | अशुभ |
| 6 | साधक | शुभ |
| 7 | वध | अशुभ |
| 8 | मित्र | शुभ |
| 9 | अतिमित्र | शुभ |
बाक़ी सात कूट
दोनों का जन्म-विवरण भरिए
तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।