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अष्टकूट · 4 गुण

योनि

स्वाभाविक अनुकूलता

4गुण
36आठ कूट, छत्तीस गुण

सत्ताईस नक्षत्रों की चौदह योनियाँ हैं — अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, गौ, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल, सिंह। एक ही योनि पूरे चार गुण; शत्रु-योनि (गौ-व्याघ्र, सर्प-नकुल जैसी सात जोड़ियाँ) शून्य।

शून्य आने पर क्या

योनि में शून्य तभी आता है जब दोनों की योनि शत्रु-युग्म हो (गौ-व्याघ्र, सर्प-नकुल जैसी सात जोड़ियाँ)। यह गंभीर नहीं पर उपेक्षणीय भी नहीं — स्वाभाविक अनुकूलता कम रहती है।

कैसे गिना जाता है

  1. दोनों के नक्षत्र से योनि निकालिए — चौदह पशु-योनियों में से एक। सत्ताईस नक्षत्र और चौदह योनियाँ, इसीलिए लगभग हर योनि दो नक्षत्रों में आती है।
  2. 14×14 की तालिका से अंक — एक ही योनि 4, मित्र 3, सम 2, शत्रु 1, और महा-वैरी 0।

यहाँ हम आम प्रचलन से अलग चलते हैं

चार अंकों वाले इस कूट में पूरी पाँच सीढ़ियाँ हैं, इसलिए 2 और 3 जैसे बीच के अंक आम हैं। शून्य सिर्फ़ सात जोड़ियों में आता है — नीचे सारणी में वे सातों नाम से दी हैं।

निर्णय में इसका भार

इस कूट का अपना अलग मत नहीं है। यह “छत्तीस गुण” वाले एक ही मत में गिना जाता है — यानी वर्ण, वश्य, तारा, योनि और ग्रह-मैत्री, पाँचों मिलकर उसी एक मत में आते हैं।

मतभार
छत्तीस गुण — सब मिलाकर1.0
नाड़ी — अपना अलग मत1.3
भकूट — अपना अलग मत1.1
गण — अपना अलग मत0.9
दशकूट — रज्जु व वेध0.6
विस्तारित कूट0.6
बाक़ी 33 मत24.2
कुल — 3929.7

हमारा निर्णय 39 मतों को भार-सहित तोलकर बनता है, जिनका कुल भार 29.7 है। छत्तीसों गुण मिलकर उनमें से एक मत हैं — यानी पूरे निर्णय का लगभग 3.4%। बाक़ी सप्तम भाव, नवांश, सप्तांश, विंशोपक, जैमिनी, दशा-काल और मांगलिक जैसे मत तय करते हैं। यही वजह है कि यह रिपोर्ट कम गुण देखकर विवाह से कभी मना नहीं करती।

शास्त्रीय सारणी

नक्षत्रयोनिनक्षत्रयोनिनक्षत्रयोनि
1. अश्विनीअश्व2. भरणीगज3. कृत्तिकामेष
4. रोहिणीसर्प5. मृगशिरासर्प6. आर्द्राश्वान
7. पुनर्वसुमार्जार8. पुष्यमेष9. आश्लेषामार्जार
10. मघामूषक11. पूर्वाफाल्गुनीमूषक12. उत्तराफाल्गुनीगौ
13. हस्तमहिष14. चित्राव्याघ्र15. स्वातिमहिष
16. विशाखाव्याघ्र17. अनुराधामृग18. ज्येष्ठामृग
19. मूलश्वान20. पूर्वाषाढ़ावानर21. उत्तराषाढ़ानकुल
22. श्रवणवानर23. धनिष्ठासिंह24. शतभिषाअश्व
25. पूर्वाभाद्रपदसिंह26. उत्तराभाद्रपदगौ27. रेवतीगज

शत्रु-योनि की जोड़ियाँ — इनमें योनि कूट शून्य रहता है:

अश्व — महिष · गज — सिंह · मेष — वानर · सर्प — नकुल · श्वान — मृग · मार्जार — मूषक · गौ — व्याघ्र

बाक़ी सात कूट

हर कूट विस्तार से पढ़िए

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तारीख़, समय और जगह — तीनों जितने सही होंगे, मिलान उतना ही सटीक। समय याद न हो तो भी चल जाएगा।

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